
Jamshedpur : केरल समाजम की ओर से रविवार को जमशेदपुर में ओणम उत्सव धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। केरल के प्रमुख त्योहार ओणम के अवसर पर आयोजित समारोह में समाज के सदस्यों, उनके परिवारों और शुभचिंतकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। पूरे कार्यक्रम में केरल की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और खान-पान की झलक देखने को मिली।
केरल समाजम परिसर में आयोजित समारोह की शुरुआत आकर्षक पुक्कलम यानी फूलों की रंगोली से हुई। समाज के सदस्यों ने विभिन्न रंगों के फूलों से खूबसूरत पुक्कलम तैयार किए। इसके बाद सदस्यों के बीच पुक्कलम प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान बच्चों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। पारंपरिक गीत-संगीत और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह के माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण पुलिकली यानी टाइगर डांस रहा। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति ने लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।
समारोह में राजा महाबली के स्वागत की विशेष प्रस्तुति भी दी गई। इसके माध्यम से ओणम से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं और परंपराओं को जीवंत किया गया।
कार्यक्रम के अंत में ग्रैंड ओणसद्या का आयोजन हुआ। केले के पत्ते पर परोसे गए केरल के पारंपरिक व्यंजनों का लोगों ने आनंद लिया। सामूहिक भोज के जरिए केरल की खान-पान की परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की खास झलक देखने को मिली।
समारोह में केरल समाजम के अध्यक्ष के. मुरलीधरन, महासचिव सुनील कुमार, चेयरमैन टी.के. सुकुमारन, बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के सदस्य टी.ए. राधाकृष्णन और पी. ससीधरन, उपाध्यक्ष विनु कुमार, सहायक सचिव पी.के. शंभुजन और टी.टी. राजू, सहायक कोषाध्यक्ष विनोद मेनन सहित कार्यकारिणी समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
केरल समाजम के अनुसार, समारोह में 1000 से अधिक सदस्यों, उनके परिवारों और शुभचिंतकों ने हिस्सा लिया। सभी के सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
राजा महाबली से जुड़ी है ओणम की मान्यता
ओणम केरल का प्रमुख त्योहार है, जिसे राजा महाबली की स्मृति और उनके अपनी प्रजा से मिलने की मान्यता के साथ मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा महाबली से तीन पग भूमि मांगी थी। इसके बाद वामन ने विराट रूप धारण कर तीन पग में पूरी सृष्टि को नाप लिया।
मान्यता है कि राजा महाबली को वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने की अनुमति मिली थी। इसी खुशी में ओणम मनाया जाता है। इसे अच्छी फसल, समृद्धि और खुशहाली का त्योहार भी माना जाता है। करीब दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में पुक्कलम, पारंपरिक नृत्य-संगीत, खेल और ओणसद्या जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
जमशेदपुर में केरल समाजम का यह आयोजन केरल की संस्कृति और परंपराओं को जीवंत करने के साथ ही विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव और आपसी भाईचारे का संदेश भी देता नजर आया।

