
रांची : राजधानी के मोरहाबादी मैदान में रविवार को आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान में पूर्व विधायक बंधु तिर्की ने परिसीमन के मुद्दे पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बचाने की लड़ाई है। परिसीमन के नाम पर झारखंड में आदिवासियों की राजनीतिक हिस्सेदारी कम करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड की पहचान, यहां की सामाजिक संरचना और आदिवासी समाज के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। जनसंख्या के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया अपनाकर आदिवासी समाज के प्रतिनिधित्व को कम करने की कोशिश हुई तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
उन्होंने पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी समाज को मिले संवैधानिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आदिवासी समाज को अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
बंधु तिर्की ने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा को भी आदिवासी अस्मिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि पेसा कानून समेत आदिवासी हितों से जुड़े संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों को कमजोर करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
मोरहाबादी मैदान में जुटे बड़ी संख्या में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को संगठित होकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखानी होगी। परिसीमन का सवाल केवल सीटों के पुनर्गठन का नहीं है, बल्कि यह आदिवासियों के भविष्य, राजनीतिक भागीदारी और संवैधानिक अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ है।
उन्होंने महाजुटान के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों, पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से कोई समझौता नहीं करेगा।

