
रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता अर्जुन मुंडा के सुरक्षा काफिले में शामिल एक वाहन शुक्रवार को एनएच-33 पर चौका के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया। मुंडा उस समय खूंटी से जमशेदपुर जा रहे थे। उन्होंने बताया कि हादसे में उन्हें और उनकी सुरक्षा में तैनात किसी भी जवान को चोट नहीं आई है।
अर्जुन मुंडा ने सोशल मीडिया पर घटना की जानकारी देते हुए राज्य सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा काफिले में इस्तेमाल किए जा रहे सरकारी वाहनों की हालत बेहद खराब है। पुराने और जर्जर वाहनों के कारण न केवल सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि सुरक्षाकर्मियों की जान भी जोखिम में है।
मुंडा के मुताबिक, उनके कार्यालय की ओर से वाहनों की खराब स्थिति, बार-बार होने वाली तकनीकी गड़बड़ियों और उनसे सुरक्षा पर पड़ रहे असर को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे गए हैं। उन्होंने 28 जुलाई 2024, 22 अगस्त 2024, 19 अप्रैल 2025, 11 सितंबर 2025, 9 मार्च 2026 और 29 जून 2026 को भेजे गए पत्रों का विवरण भी साझा किया है।
उन्होंने बताया कि गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने भी 14 मार्च 2026 को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया था। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। मुंडा का आरोप है कि वाहनों की सामान्य मरम्मत कर उन्हें फिर से सुरक्षा काफिले में लगा दिया जाता है, लेकिन कुछ ही समय बाद उनमें दोबारा तकनीकी खराबी आ जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई वाहनों में सायरन और झंडे जैसी पहचान की व्यवस्था नहीं है। इससे दूसरे वाहन चालकों को सुरक्षा काफिले का पता नहीं चल पाता और कई बार अन्य गाड़ियां काफिले के बीच में प्रवेश कर जाती हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी। उन्होंने सरकार से तत्काल संज्ञान लेकर सुरक्षा काफिले के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित और तकनीकी रूप से दुरुस्त वाहन उपलब्ध कराने की मांग की है।
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