
चाईबासा : झारखंड के आराध्य एवं धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा को उनके मूल स्थान से हटाए जाने और उसे खंडित कर बेसहारा छोड़ने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। टोकलो हाट बाजार चौक से प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में आदिवासी मुंडा समाज ने उग्र आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा को ससम्मान
पुनस्र्थापित करने तथा इस कृत्य के लिए दोषी व्यक्तियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार से चक्रधरपुर प्रखंड कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आगाज कर दिया गया है।
इस विरोध प्रदर्शन में आदिवासी मुंडा समाज के साथ-साथ विभिन्न अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी भारी संख्या में शामिल होकर अपना समर्थन दे रहे हैं। अनिश्चितकालीन अनशन की शुरुआत करने से पूर्व आंदोलनकारियों ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात, समाज के संरक्षक रामलाल मुंडा के नेतृत्व में इस आंदोलन को औपचारिक रूप से शुरू किया गया।
आंदोलनकारियों का रुख और आरोप
प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि भगवान बिरसा मुंडा सिर्फ किसी एक आदिवासी समाज तक सीमित महापुरुष नहीं हैं, बल्कि वे पूरे राष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम और जल, जंगल, जमीन के अधिकारों की रक्षा के महान प्रतीक हैं। ऐसे अमर नायक की प्रतिमा को अपमानजनक तरीके से हटाना और उसे क्षतिग्रस्त अवस्था में छोड़ना अत्यंत पीड़ादायक है, जिससे संपूर्ण समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
आदिवासी मुंडा समाज पोड़ाहाट, चक्रधरपुर के मुताबिक, इस घटना को लेकर प्रशासन को पहले ही कई बार आगाह किया जा चुका था।
क्या कहा आंदोलन कारी
3 नवंबर: अनुमंडल प्रशासन को लिखित शिकायत देकर इस घटना की पूरी जानकारी दी गई थी।
5 नवंबर: पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त को भी ज्ञापन सौंपकर प्रतिमा की पुनस्र्थापना और दोषियों पर शिकंजा कसने की मांग की गई थी।
समाज का गंभीर आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने और प्रशासन को स्थिति से अवगत कराने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी उदासीनता और रोष के कारण उन्हें बाध्य होकर इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा।
प्रमुख मांगें
1. भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा को पूर्ववत टोकलो हाट बाजार चौक पर पूरी गरिमा और सम्मान के साथ दोबारा स्थापित किया जाए।
2. प्रतिमा को हटाने और नुकसान पहुँचाने वाली इस घटना की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जाँच हो।
3. घटना में संलिप्त लोगों की शिनाख्त कर उनकी त्वरित गिरफ्तारी की जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
आंदोलनकारियों ने दो टूक
शब्दों में चेतावनी दी है कि महापुरुषों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस बाबत झारखंड के मुख्यमंत्री, पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त और स्थानीय अनुमंडल प्रशासन को भी आधिकारिक सूचना प्रेषित कर दी गई है। अनशनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, यह भूख हड़ताल जारी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम पर अब जिला प्रशासन के अगले कदमों की ओर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
इस अनशन कार्यक्रम में अर्जुन मुंडा, संतोष मुंडा, विजय नग, चंद्रशेखर मुंडा समेत बड़ी संख्या में आदिवासी एवं मूलवासी समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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