
- स्वास्थ्य विभाग का कड़ा रुख: पलामू में होर्डिंग्स लगाकर प्रचार करने वाले डॉक्टर रडार पर, सभी को थमाया गया नोटिस
पलामू : जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने और मरीजों की जेब पर होने वाले डाके को रोकने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। अब जिले के सभी प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिकों को अपने इलाज की दरों को अस्पताल के बाहर लगाना होगा। इसके अलावा, मेडिकल स्टोरों पर मिलने वाली दवाओं की कीमतें भी सार्वजनिक करनी होंगी ताकि आम लोगों को किसी तरह की धोखाधड़ी का सामना न करना पड़े।
हाल के दिनों में पलामू में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इलाज में लापरवाही के कारण महिलाओं और बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। इसके अलावा, एक गर्भपात का मामला तो राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया था। इन तमाम घटनाओं और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पलामू स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने नेशनल मेडिकल काउंसिल के नियमों का सख्ती से पालन कराने का फैसला किया है और पहले चरण में सभी डॉक्टरों को नोटिस जारी कर दिया गया है।
भ्रामक प्रचार करने वाले डॉक्टर भी रडार पर
अस्पतालों की मनमानी के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग उन डॉक्टरों पर भी शिकंजा कस रहा है जो बड़े-बड़े होर्डिंग और बैनर लगाकर अपनी झूठी और भ्रामक पब्लिसिटी करते हैं। सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव के अनुसार एनएमसी के नियमों के मुताबिक कोई भी डॉक्टर या अस्पताल अपने प्रचार के लिए होर्डिंग्स का इस्तेमाल नहीं कर सकता। नियमों का उल्लंघन करने वालों की सूची तैयार की जा रही है, जिसे जीपीएस लोकेशन के सबूत के साथ नेशनल मेडिकल काउंसिल को भेजा जाएगा।
जिले में हैं करीब 200 निजी अस्पताल
पलामू के जिला मुख्यालय मेदिनीनगर में 30 से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल चल रहे हैं, जबकि पूरे पलामू जिले में लगभग 200 छोटे-बड़े निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालित हैं। नए नियमों के लागू होने से अब इन सभी अस्पतालों को अपनी फीस और इलाज का पूरा ब्यौरा बाहर डिसप्ले करना अनिवार्य होगा। प्रशासन के इस सख्त रवैये से निजी अस्पतालों और डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है, और उम्मीद जताई जा रही है कि इससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।
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