नई दिल्ली : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक के आवास और अन्य ठिकानों पर विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) के तहत दर्ज एक मामले में छापेमारी की। दुर्गेश पाठक हाल ही में वर्ष 2027 के गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के प्रभारी नियुक्त किए गए थे।
FCRA मामले में CBI की कार्रवाई और AAP की प्रतिक्रिया
CBI की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब आम आदमी पार्टी गुजरात में अपने राजनीतिक विस्तार की कोशिशों में लगी हुई है। पार्टी ने पिछले महीने दुर्गेश पाठक और वरिष्ठ नेता गोपाल राय को गुजरात चुनावों के लिए प्रभारी नियुक्त कर भाजपा के गढ़ में मजबूती से उतरने का संकेत दिया था।
AAP ने CBI की इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार, विशेष जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, ताकि गुजरात में AAP की बढ़ती लोकप्रियता को रोका जा सके।
AAP का आरोप : ‘डर गई है भाजपा, भेजा गया ‘पिंजरे का तोता’
AAP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा,
AAP के बढ़ते जनाधार से घबराई मोदी सरकार ने हमारे नेताओं के पीछे ‘पिंजरे का तोता’ भेज दिया है। पार्टी ने यह भी कहा कि वे शहीद भगत सिंह के अनुयायी हैं और किसी भी तानाशाही से डरने वाले नहीं हैं।
गुजरात में AAP का राजनीतिक विस्तार
गुजरात, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का गृह राज्य है, वहां AAP धीरे-धीरे अपनी जड़ें मजबूत कर रही है। वर्तमान में AAP सूरत नगर निगम में विपक्ष में है, साथ ही सालाया और करजन की नगरपालिकाओं में भी पार्टी की उपस्थिति है। इसके अलावा, AAP के गुजरात विधानसभा में चार विधायक भी हैं।
राजनीतिक तनाव और विपक्षी हमले
CBI की इस छापेमारी के बाद गुजरात और दिल्ली में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। AAP नेताओं ने इसे ‘दबाव की राजनीति’ करार दिया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा की ‘सिकुड़ती राजनीतिक ज़मीन’ और ‘AAP की बढ़ती लोकप्रियता’ के कारण केंद्र सरकार ऐसे कदम उठा रही है।

