
चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत झींकपानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्रसव (डिलीवरी) के एवज में अवैध रूप से पैसों की मांग करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। गुरुवार को इस मुद्दे को लेकर अस्पताल परिसर में परिजनों ने जमकर विरोध-प्रदर्शन और हंगामा किया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स और सफाई कर्मचारी द्वारा उनसे पैसों की उगाही की गई।जानकारी के मुताबिक झींकपानी गांव निवासी सीमा सवैया को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। प्रसव संपन्न होने के बाद परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात नर्स और सफाई कर्मी ने मिलकर उनसे 500 से 1000 रुपये की मांग की।
500 दिया, फिर मांगने आया 500 : आरती

आरती सवैया, पीड़िता की बहन
पीड़िता की बहन आरती सवैया ने बताया कि हमने शुरुआत में उन्हें 500 रुपये दे दिए थे। लेकिन कुछ ही देर बाद सफाई कर्मचारी दोबारा आई और 500 रुपये और मांगने लगी। सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों से इस तरह जबरन पैसे वसूलना पूरी तरह गलत है।
पूर्व जिला परिषद सदस्य ने जताया विरोध
अस्पताल में हंगामे की खबर मिलते ही पूर्व जिला परिषद सदस्य जॉन मिरन मुंडा मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और तुरंत सीएचसी की प्रभारी चिकित्सक डॉ. सोनी हेंब्रम से मिलकर इस मामले की शिकायत की।
आरोप सच पाए जाते हैं, तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई : प्रभारी

सोनी हेंब्रम, डॉक्टर CHC
प्रभारी चिकित्सक डॉ. सोनी हेंब्रम ने कहा कि अस्पताल में इस तरह की पैसा लेने की शिकायत पहले कभी नहीं आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। यदि आरोप सच पाए जाते हैं, तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पैसा लिया है, खुशी से दिया

नर्स
नर्स प्रतिमा देवी ने कैमरे के सामने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परिजनों ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि बच्चे के जन्म की खुशी में स्वेच्छा से 500 रुपये दिए थे। उनसे किसी भी तरह की जबरदस्ती नहीं की गई थी।लोग हमेशा देते हैं।
सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। परिजनों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि वर्तमान में सीएचसी में भर्ती सभी प्रसूता महिलाओं से पूछताछ की जाए और पिछले कुछ समय में हुए ऐसे लेन-देन की गहन जांच हो। स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों के अनुसार, जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी या विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

