Home » 7 मई को सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल, देशभर के 244 जिलों में तैयारी पूरी

7 मई को सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल, देशभर के 244 जिलों में तैयारी पूरी

यह मॉक ड्रिल न केवल सुरक्षा बलों की तत्परता की परीक्षा होगी, बल्कि नागरिक भागीदारी और जन-जागरूकता के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है।

by Reeta Rai Sagar
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

नई दिल्ली: देश में बढ़ते “नए और जटिल खतरों” को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 7 मई को एक व्यापक सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपातकाल जैसी स्थिति में नागरिक सुरक्षा प्रणाली की तैयारियों का मूल्यांकन करेगा।

गृह सचिव गोविंद मोहन ने की तैयारियों की समीक्षा
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और सिविल डिफेंस प्रमुखों के साथ इस अभ्यास की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में सिविल डिफेंस तंत्र को मजबूत करने और किसी भी “दुश्मन हमले” की स्थिति से निपटने की रणनीति पर विचार हुआ।

सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल 7 मई को, कौन-कौन होगा शामिल
इस मॉक ड्रिल में शामिल किए जाएंगे:
• जिला नियंत्रक
• स्थानीय प्रशासन
• सिविल डिफेंस वार्डन
• स्वयंसेवक
• होम गार्ड्स (सक्रिय और आरक्षित)
• नेशनल कैडेट कोर (NCC)
• नेशनल सर्विस स्कीम (NSS)
• नेहरू युवा केंद्र संगठन (NYKS)
• स्कूल और कॉलेज के छात्र
ड्रिल का आयोजन गांव स्तर तक किया जाएगा, जिससे सभी जिलों की तैयारी का मूल्यांकन संभव हो सके।

मॉक ड्रिल के दौरान आम जनता को क्या अनुभव हो सकता है
• कुछ जिलों में अस्थायी ब्लैकआउट
• मोबाइल सिग्नल की अस्थायी बंदी
• यातायात डायवर्जन
• निकासी अभ्यास (Evacuation Drill)
• हवाई हमले की चेतावनी प्रणाली की जांच की जा सकती है।
इन अभ्यासों की जानकारी जनसंचार माध्यमों से पूर्व में दी जाएगी, ताकि सामान्य जनजीवन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

उत्तर प्रदेश और कश्मीर में भी तैयारियां जोरों पर
उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार ने बताया कि राज्य के जिलों में स्थानीय प्रशासन ड्रिल का समय स्वयं तय करेगा। वहीं, श्रीनगर के डल झील जैसे प्रमुख क्षेत्रों में पहले से ही अभ्यास शुरू कर दिया गया है।

सिविल डिफेंस रूल्स, 1968 के अंतर्गत किया जा रहा आयोजन
यह अभ्यास Civil Defence Rules, 1968 के अंतर्गत किया जा रहा है और इसका उद्देश्य है:
• राष्ट्रीय आपातकालीन स्थिति में नागरिक प्रतिक्रिया तंत्र की परख
• जिला नियंत्रण कक्ष और शैडो कंट्रोल रूम की कार्यक्षमता की जांच
• नागरिकों, स्वयंसेवकों और सुरक्षाबलों के बीच समन्वय की परख
यह अभ्यास किसी तात्कालिक खतरे का संकेत नहीं है बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक अहम कदम
यह मॉक ड्रिल न केवल सुरक्षा बलों की तत्परता की परीक्षा होगी, बल्कि नागरिक भागीदारी और जन-जागरूकता के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। गृह मंत्रालय का यह कदम देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

Related Articles