हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली : बरसात के दिनों में डेंगू, चिकुनगुनिया व जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) के मामले हर साल बढ़ जाते हैं लेकिन इस बार डेंगू अपना स्वरूप बदलकर आया है। यानि डेंगू ने अपना रूप बदल लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल में टाइप-2 डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में देश के दूसरे राज्यों के लोगों को भी काफी सतर्क होने की जरूरत है। चूंकि, अन्य वायरस की तरह अब डेंगू ने भी अपना रूप बदल रहा है।
केरल में मिल रहे टाइप-2 के सबसे ज्यादा मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, केरल में टाइप-1,2 और 4 वायरस की पहचान हुई है लेकिन सबसे ज्यादा टाइप-2 डेंगू के मामले मिले हैं। झारखंड के जाने-माने महामारी रोग विशेषज्ञ डा. असद करते हैं कि डेंगू के चार टाइप के होते है। हालांकि, देश के अन्य राज्यों में अभी तक टाइप-2 डेंगू के मामले सामने नहीं आए हैं चूंकि डेंगू बुखार एक संक्रमण बीमारी है इसलिए वायरस जब देश के किसी एक हिस्से में फैलता है तो उसके बाद दूसरे राज्यों में भी फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
कितने तरह के होते हैं डेंगू वैरिएंट?
डॉ. असद कहते हैं कि डेंगू के मुख्य रूप से चार अलग-अलग सीरोटाइप ( DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) होते हैं। ये सभी एडीज मच्छरों की कुछ प्रजातियों, मुख्य रूप से एई, के काटने से फैलता है।
इनके लिए खतरनाक हो सकते हैं टाइप-2 डेंगू
डॉ. असद कहते हैं कि कोई भी बीमारी से लड़ने के लिए मरीज का रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) अच्छी होनी चाहिए। अगर, जिनकी इम्युनिटी ठीक नहीं रहती
उनको बीमारी सबसे पहले चपेट में रहती है। चूंकि, शरीर कमजोर रहता है। ऐसे में अपने शरीर के इम्युनिटी को बढ़ाने की जरूरत है।
टाइप-2 डेंगू का समय पर इलाज जरूरी
डा. असद कहते हैं कि टाइप-2 डेंगू भी एडीज प्रजाति के मच्छरों के काटने से ही होता है। हालांकि, यह मरीजों को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में इसका लक्षण सामने आते ही मरीजों को चिकित्सक से दिखाना चाहिए और उसकी जांच कराना चाहिए। ताकि समय पर इलाज शुरू हो सकें।
ये हैं टाइप-2 डेंगू के लक्षण
टाइप-2 डेंगू के लक्षण में सामान्य डेंगू से मिलता जुलता है। इसमें मतली-उल्टी, शरीर में दर्द, गले में खराश, आंखों के पीछे दर्द जैसे लक्षण होते हैं। इस तरह के लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी परिस्थिति में तत्काल किसी अच्छे चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

