
रांची: जब प्रदेश का मुखिया बिना किसी भारी-भरकम लाव-लश्कर और वीआईपी प्रोटोकॉल के अचानक आपके बीच आ जाए, तो हैरान होना लाजमी है। मंगलवार की सुबह कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला झारखंड के रामगढ़ और बोकारो की सीमा से सटे कसमार इलाके में। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी सह विधायक कल्पना सोरेन अचानक से आम जनता के बीच नजर आए, जिससे पूरे इलाके में एक सुखद चर्चा छिड़ गई।
पैतृक गांव से अचानक निकला काफिला
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मंगलवार को कोई सरकारी या आधिकारिक कार्यक्रम तय नहीं था। वे अपने पैतृक गांव नेमरा से सीधे सड़क मार्ग से निकले और रास्ते में बन रही कसमार-बरलंगा सड़क के निर्माण कार्य का खुद जायजा लिया।
काम की गुणवत्ता परखते हुए वे सीधे कसमार बाजार जा पहुंचे। बिना किसी पूर्व सूचना के मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर स्थानीय लोग पहले तो चौंके, फिर उनके चेहरे खुशी से खिल उठे।
तीनकोनिया चौक पर बिताए कुछ पल
दौरे का सबसे यादगार पल तब आया जब सीएम और कल्पना सोरेन कसमार के तीनकोनिया चौक पर स्थित कुणाल जायसवाल की छोटी सी चाय-पकौड़ी की दुकान पर जा पहुंचे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि प्रदेश के मुख्यमंत्री आम लोगों की तरह नुक्कड़ की दुकान पर रुकेंगे।
दोनों ने वहां करीब 10 मिनट बिताए। उन्होंने खुद भी गरमा-गरम पकौड़ी का स्वाद लिया और प्यार से वहां मौजूद ग्रामीणों को भी पकौड़ी खिलाई। इस दौरान आम लोगों के साथ उनका यह दोस्ताना और सरल बर्ताव देख हर कोई गदगद हो गया।
ग्रामीणों ने इस अनमोल पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया और मुख्यमंत्री के साथ जमकर तस्वीरें खिंचवाईं। मुख्यमंत्री ने भी मुस्कुराते हुए स्पष्ट किया कि यह कोई पॉलिटिकल या सरकारी दौरा नहीं है, वे बस सुकून के कुछ पल बिताने और इलाके का हाल जानने निकले हैं।
सेवाती घाटी में पर्यटन विकास की जगी उम्मीद
सिर्फ चाय की दुकान पर रुकना ही नहीं, बल्कि इस दौरे का एक और बड़ा और दूरगामी पहलू सामने आया। कसमार से लौटते वक्त सीएम हेमंत सोरेन की गाड़ी प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर ‘सेवाती घाटी’ के पास रुकी। उन्होंने वहां की भौगोलिक स्थिति और वादियों का करीब से जायजा लिया।
मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने की खबर मिलते ही बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा भी तुरंत मौके पर पहुंच गए। इस दौरान घाटी के विकास और इसकी संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। आपको बता दें कि सेवाती घाटी अपनी नैसर्गिक सुंदरता के लिए पूरे इलाके में जानी जाती है, लेकिन लंबे समय से इसे एक आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की मांग उठती रही है।
स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के द्वार
भले ही सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मुख्यमंत्री के खुद इस घाटी में कदम रखने और स्थिति का जायजा लेने से स्थानीय लोगों और कारोबारियों की उम्मीदें परवान चढ़ने लगी हैं। यदि सेवाती घाटी को पर्यटन मानचित्र पर जगह मिलती है, तो यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे न सिर्फ बोकारो और रामगढ़ के इस क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।
इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ झामुमो के प्रखंड अध्यक्ष दिलीप कुमार हेंब्रम, विधायक प्रतिनिधि मोहम्मद शेरे आलम और प्रखंड सचिव सोहेल अंसारी समेत कई स्थानीय गणमान्य लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री का यह सहज और ज़मीनी अंदाज जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे क्षेत्र के विकास की एक नई सुबह के रूप में देख रहे हैं।
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