
रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की केंद्रीय समिति की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र सरकार द्वारा खान और खनिज कानून में किए गए हालिया संशोधनों को उन्होंने राज्य के लिए बड़ा झटका करार दिया। सीएम सोरेन ने स्पष्ट कहा कि इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित झारखंड जैसा खनिज संपन्न राज्य ही होगा।
बिना राज्य की सहमति के लिया गया फैसला
रांची के सोहराय भवन में आयोजित पार्टी बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण विषय पर कानून बनाने से पहले केंद्र को राज्य सरकारों से विचार-विमर्श करना चाहिए था। बिना राज्यों को विश्वास में लिए विधेयक पारित करना लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है, जिससे राज्यों के अधिकार सीमित हो रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों पर पहला हक वहां के निवासियों और राज्य सरकार का होना चाहिए, लेकिन नई नीतियों से राज्यों की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर सीधा हमला हो रहा है।
बकाये राशि और आर्थिक निर्भरता पर घेरा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र पर राज्य के वाजिब हक को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र की नीतियां राज्यों को मजबूत बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक रूप से मोहताज रखने की मंशा दर्शाती हैं।
सोरेन ने कहा, झारखंड की अर्थव्यवस्था और यहां के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बड़े पैमाने पर खनिज संसाधनों से जुड़े हैं। ऐसे में कानूनों में फेरबदल से राज्य के राजस्व, जनकल्याणकारी योजनाओं और आम नागरिकों के जीवन पर सीधा बुरा असर पड़ेगा।
अधिकारों के लिए जारी रहेगा संघर्ष
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि राज्य सरकार अपने अधिकारों और जनता के हितों के संरक्षण के लिए पीछे हटने वाली नहीं है। इस फैसले के खिलाफ हर स्तर पर लोकतांत्रिक और कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
इस बैठक में झामुमो की ओर से सांसद विजय हांसदा, महुआ माजी, नलिन सोरेन के साथ-साथ विधायक कल्पना सोरेन, प्रो. स्टीफन मरांडी, हेमलाल मुर्मू और वरिष्ठ नेता विनोद पांडेय समेत पार्टी के कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे।
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