
Jamshedp
ur : जमशेदपुर पुलिस ने अपराध नियंत्रण, जनसुरक्षा और पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए QR कोड आधारित डिजिटल बीट पुलिसिंग प्रणाली की शुरुआत की है। इस नई तकनीक के जरिए जिले में पुलिस की मौजूदगी, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को डिजिटल रूप से मजबूत किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत पूर्वी सिंहभूम जिले को 206 बीट में बांटा गया है। इनमें शहरी क्षेत्र में 102 और ग्रामीण क्षेत्र में 104 बीट बनाए गए हैं। प्रत्येक बीट के लिए एक बीट पदाधिकारी की नियुक्ति की गई है, जो अपने क्षेत्र में नियमित गश्त, अपराध संबंधी सूचनाओं का संकलन, स्थानीय लोगों से संवाद और अपराध रोकथाम की जिम्मेदारी निभाएंगे।
पुलिस ने बताया कि QR कोड लगाने के लिए उन स्थानों का चयन पिछले पांच वर्षों के अपराध के आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर किया गया है। इसके अलावा बाजार, परिवहन केंद्र, सार्वजनिक स्थल, संवेदनशील इलाके और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।
नई प्रणाली के तहत प्रत्येक चिन्हित स्थान पर विशेष QR कोड लगाए गए हैं। टैंगो वाहन, पीसीआर और थाना गश्ती वाहन अपनी प्रत्येक ड्यूटी शिफ्ट में इन QR कोड को कम से कम दो बार स्कैन करेंगे। इससे गश्त का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और वरिष्ठ अधिकारी वास्तविक समय में पुलिस की गतिविधियों की निगरानी कर सकेंगे। अभी 1000 स्थलों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। भविष्य में इन स्थलों की संख्या 2000 कर दी जाएगी। क्यूआर कोड ऐसे स्थलों पर लगाए गए हैं जहां भीड़भाड़ होती है। जिन स्थलों पर महिलाएं जाती हैं। पार्क और खेलकूद के स्थल हैं। पार्क आदि को इस दायरे में लिया गया है। यह क्यूआार कोड आम आदमी के स्कैन करने के लिए नहीं लगाए हैं। पुलिस स्कैन करेगी। कंट्रोल रूम में इसका रिकार्ड तैयार होगा कि कहां कहां गश्त हो रही है। अगर किसी इलाके में गश्त नहीं होगी तो वहां के बीट इंचार्ज सवालों के घेरे में आएंगे।
इसके साथ ही प्रत्येक बीट पदाधिकारी को प्रतिदिन पैदल या मोटरसाइकिल से अपने क्षेत्र में गश्त करने का निर्देश दिया गया है। विशेष रूप से शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक उनकी सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी, ताकि सड़क अपराधों और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
जमशेदपुर पुलिस का मानना है कि डिजिटल बीट पुलिसिंग से अपराध संभावित क्षेत्रों की बेहतर निगरानी होगी, पुलिस की प्रतिक्रिया समय में सुधार आएगा और बीट पदाधिकारियों तथा गश्ती दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। साथ ही सामुदायिक पुलिसिंग को भी मजबूती मिलेगी और पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ेगी।
पुलिस के अनुसार आधुनिक तकनीक और पारंपरिक बीट पुलिसिंग के इस समन्वय से शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में नियमित पुलिस उपस्थिति सुनिश्चित होगी, जिससे आम नागरिकों का सुरक्षा पर भरोसा और पुलिस-जन सहयोग और मजबूत होगा।

