Home » Jamshedpur News : ‘बेटा, तुम्हारे लिए उपवास किया है, उठ जाओ…’ शव के सामने बिलखती रही मां, वियतनाम से लौटा जमशेदपुर का विनय

Jamshedpur News : ‘बेटा, तुम्हारे लिए उपवास किया है, उठ जाओ…’ शव के सामने बिलखती रही मां, वियतनाम से लौटा जमशेदपुर का विनय

विनय के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के दौरान बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। शोकाकुल लोगों का हुजूम बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट पहुंचा। वहां विधि-विधान के साथ विनय कुमार राय का अंतिम संस्कार किया गया

by Rakesh Pandey
Jamshedpur News
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

जमशेदपुर : जिस बेटे की लंबी उम्र और सलामती की कामना लेकर मां ने जितिया का कठिन व्रत रखा था, उसी बेटे का शव रविवार सुबह घर पहुंचा तो परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। कदमा के शास्त्रीनगर ब्लॉक नंबर चार में बेटे का पार्थिव शरीर देखते ही मां लग्न देवी बदहवास हो गईं। पारण के बाद जब उनकी नजर घर के दरवाजे पर रखे बेटे विनय कुमार राय के शव पर पड़ी तो वे खुद को संभाल नहीं सकीं। बेटे को उठाने की कोशिश करते हुए वह बार-बार यही कहती रहीं कि बेटा, तुम्हारे लिए उपवास किया है, उठ जाओ। मां की यह स्थिति देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

वियतनाम में हादसे ने छीन लिया विनय

रमेश राय के पुत्र विनय कुमार राय करीब दो वर्ष पहले योग शिक्षा का प्रशिक्षण लेने के बाद वियतनाम गए थे। वहां वह योग से जुड़े कार्य कर रहे थे। 25 सितंबर की रात हल्की बारिश के दौरान विनय और रांची निवासी राजा कुमार स्कूटी से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान बारिश के कारण स्कूटी का संतुलन बिगड़ गया। स्कूटी फिसलने के बाद दोनों युवक सड़क पर नियंत्रण खो बैठे और सामने से आ रही ओमनी कार से उनकी टक्कर हो गई। हादसा इतना गंभीर था कि विनय कुमार राय और राजा कुमार दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। विदेश में हुए इस हादसे के बाद दोनों युवकों के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

शव घर पहुंचते ही मचा कोहराम

विनय कुमार राय का पार्थिव शरीर शनिवार देर रात जमशेदपुर पहुंचा। सांसद विद्युत वरण महतो, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की पहल के बाद शव को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हो सकी। जमशेदपुर पहुंचने के बाद पार्थिव शरीर को टाटा मुख्य अस्पताल में रखा गया था।

रविवार सुबह विनय का शव कदमा स्थित शास्त्रीनगर स्थित घर पहुंचाया गया। बेटे के पार्थिव शरीर को देखते ही परिवार के सदस्यों का धैर्य जवाब दे गया। मां लग्न देवी बेटे के चेहरे को लगातार निहारती रहीं। वह भगवान से अपने बेटे को वापस लौटाने की गुहार लगाती रहीं। जिस बेटे की सलामती के लिए उन्होंने जितिया का उपवास रखा था, उसके निर्जीव शरीर को सामने देखकर मां की पीड़ा ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर दिया।

पारण के बाद सामने आया बेटे का शव

विनय की मां ने बेटे की लंबी उम्र की कामना के लिए जितिया का व्रत रखा था। रविवार को व्रत का पारण करने के बाद उन्हें बेटे के घर आने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ ही देर बाद बेटे का शव घर पहुंचा। इस दृश्य ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।

बेटे के शव के पास पहुंचकर मां उसे उठाने का प्रयास करती रहीं। वह बार-बार बेटे से उठने की बात कहती रहीं। परिवार के अन्य सदस्य भी इस दुखद दृश्य के बीच खुद को संभाल नहीं सके। पिता रमेश राय, दादा-दादी समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग

विनय के निधन की खबर के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उनके घर पहुंचे। शास्त्रीनगर में रविवार सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। परिवार को सांत्वना देने के लिए रिश्तेदारों और परिचितों के साथ आसपास के लोग भी पहुंचे। पूरे इलाके में शोक का माहौल रहा। विनय के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के दौरान बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। शोकाकुल लोगों का हुजूम बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट पहुंचा। वहां विधि-विधान के साथ विनय कुमार राय का अंतिम संस्कार किया गया।

विदेश में काम कर रहे थे विनय

विनय कुमार राय ने योग शिक्षा का प्रशिक्षण लिया था और करीब दो वर्ष पहले इसी क्षेत्र में काम करने के लिए वियतनाम गए थे। विदेश में रहते हुए वह अपने काम में जुटे थे। परिवार को उनसे बेहतर भविष्य की उम्मीद थी। लेकिन 25 सितंबर की रात हुए सड़क हादसे ने परिवार से उनका सहारा छीन लिया।

विनय की मौत के बाद उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने में कई स्तरों पर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। सांसद विद्युत वरण महतो, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की पहल के बाद शनिवार देर रात उनका शव जमशेदपुर पहुंच सका। इसके बाद रविवार सुबह अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को उनके घर ले जाया गया।

जितिया के दिन बेटे को खोने का गम

जितिया पर्व पर मां अपने बेटे की लंबी उम्र और सलामती की कामना करती हैं। लग्न देवी ने भी बेटे विनय की कुशलता के लिए व्रत रखा था। उन्हें क्या पता था कि व्रत पूरा होने के बाद जिस बेटे के चेहरे को देखने की उम्मीद थी, उसी का पार्थिव शरीर उनके सामने होगा।

विनय की अंतिम यात्रा के दौरान शास्त्रीनगर का माहौल गमगीन रहा। परिवार के लोगों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। पार्वती घाट पर अंतिम संस्कार के बाद विनय की जीवन यात्रा समाप्त हो गई, लेकिन उनके परिवार के लिए यह सदमा लंबे समय तक बना रहेगा।

Read Also- Ranchi Yoga Teacher : जिस बेटे के लौटने का था इंतजार, ताबूत में घर पहुंचा राजा वर्मा, कैलाश नगर में पसरा मातम

Related Articles

Leave a Comment