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Ramgarh Education News: मैट्रिक में खराब रिजल्ट पर DEO ने चलाया विभागीय डंडा; 12 स्कूलों के प्राचार्य व शिक्षकों का वेतन रोका

by Kanchan Kumar
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रामगढ़। जैक मैट्रिक के रिजल्ट में रामगढ़ जिले के कई विद्यालयों का परफॉर्मेंस काफी खराब रहा। जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमारी नीलम ने रिजल्ट की समीक्षा करने के बाद निराशाजनक परिणाम देनेवाले संबंधित विद्यालयों के प्राचार्य एवं शिक्षकों पर विभागीय डंडा चलाया है। 12 स्कूलों के प्राचार्य एवं शिक्षकों के वेतन पर रोक लगा दी है।

उन्होंने जैक (झारखण्ड अधिविध परिषद) एवं सीबीएसई माध्यमिक परीक्षा 2026 के परीक्षाफल की समीक्षा के उपरांत जिले के सरकारी एवं उत्क्रमित उच्च विद्यालयों के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया। डीसी ऋतुराज के निर्देशानुसार की गई समीक्षा में पाया गया कि जिले के कई विद्यालयों का परीक्षाफल संतोषजनक नहीं हैं।

52 विद्यालयों को शो कॉज नोटिस

अपेक्षित परिणाम नहीं देने वाले 52 विद्यालयों को उन्होंने शो कॉज नोटिस जारी किया गया है। जिले के ऐसे 52 विद्यालय जिनका परीक्षाफल 100 प्रतिशत नहीं रहा है,उन्हें 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। इन विद्यालयों का उत्तीर्णता प्रतिशत 87 से 99 प्रतिशत के बीच रहा है।

12 विद्यालयों का रिजल्ट फिसड्डी

चिंतनीय प्रदर्शन वाले 12 विद्यालयों पर गाज गिरी है। समीक्षा में 12 ऐसे विद्यालयों की पहचान की गई जिनका परीक्षाफल अत्यंत निराशाजनक और चिंतनीय श्रेणी में है। इन स्कूलों में उत्तीर्णता का स्तर 68 प्रतिशत (न्यूनतम) तक गिर गया है। इन 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं संबंधित टी.जी.टी. शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त होने तक इनका वेतन भुगतान बंद रहेगा।

सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले पांच स्कूल

सबसे कम प्रदर्शन करने वाले शीर्ष 5 विद्यालय का नाम भी जारी किया गया है। डीईओ ने बताया कि उत्क्रमित उच्च विद्यालय, लपंगा—68 प्रतिशत, उत्क्रमित उच्च विद्यालय, छत्तरमांडू—71 प्रतिशत, उत्क्रमित उच्च विद्यालय, डाड़ीडीह—73 प्रतिशत, उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बीचा—75 प्रतिशत, उत्क्रमित उच्च विद्यालय, कंजगी—78 प्रतिशत रिजल्ट रहा है।

शिक्षकों की लापरवाही से शैक्षणिक गुणवत्ता पर उठा सवाल

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जहां जिले के कई विद्यालयों ने शत-प्रतिशत परिणाम देकर गौरव बढ़ाया है, वहीं इन विद्यालयों का पिछड़ना शैक्षणिक गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। इस संबंध में उपायुक्त को भी आवश्यक कार्यार्थ प्रतिलिपि प्रेषित कर दी गई है।

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