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Ranchi News: झारखंड राज्यसभा चुनाव: परिमल नथवाणी को चाहिए अतिरिक्त समर्थन, प्रणव झा गठबंधन की एकजुटता पर निर्भर

परिमल नथवाणी ने सबसे पहले मेन रोड स्थित हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद राजनीतिक संपर्क अभियान शुरू किया।

by Mujtaba Haider Rizvi
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Ranchi : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में जुट गए हैं। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के बीच मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है।

शनिवार को रांची पहुंचे परिमल नथवाणी ने सबसे पहले मेन रोड स्थित हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद राजनीतिक संपर्क अभियान शुरू किया। वे विभिन्न दलों के विधायकों से मुलाकात कर अपने समर्थन का दायरा बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दिल्ली से लौट चुके हैं और रविवार से चुनावी रणनीति की कमान संभालेंगे। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू भी जल्द रांची पहुंचेंगे। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा लगातार झामुमो, राजद और भाकपा-माले के नेताओं एवं विधायकों से संपर्क बनाए हुए हैं।

विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के अनुसार भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी को एनडीए के 24 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, लेकिन जीत सुनिश्चित करने के लिए उन्हें कम से कम चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। दूसरी ओर झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है क्योंकि उन्हें अपनी पार्टी और गठबंधन का पर्याप्त समर्थन हासिल है।

कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की जीत सत्तारूढ़ गठबंधन के सभी विधायकों के शत-प्रतिशत समर्थन पर निर्भर मानी जा रही है। इस बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के विधायक जयराम महतो ने अभी तक अपने रुख का खुलासा नहीं किया है, जिससे चुनावी समीकरण और रोचक हो गए हैं।

चुनाव की घोषणा के दौरान झामुमो और कांग्रेस के बीच उम्मीदवार चयन को लेकर कुछ मतभेद सामने आए थे, लेकिन अब दोनों दलों ने सार्वजनिक बयानबाजी से दूरी बना ली है और पूरा ध्यान चुनावी प्रबंधन तथा वोटों के गणित पर केंद्रित कर दिया है।

राज्यसभा चुनाव से पहले सभी प्रमुख प्रत्याशी विधायकों से व्यक्तिगत संपर्क बढ़ा रहे हैं। नथवाणी एनडीए सहयोगी दलों के विधायकों से समर्थन मांग रहे हैं, जबकि प्रणव झा गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने और सभी सहयोगी विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करने में जुटे हैं।

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