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Ranchi Ring Road: जाम से राहत के बाद अब पर्यावरण पर फोकस; रांची रिंग रोड का होगा कायाकल्प

रांची रिंग रोड को अब एक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल 'ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर' के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। आने वाले समय में यह रोड न सिर्फ गाड़ियों के चलने के काम आएगी, बल्कि पर्यावरण को बचाने और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने का एक बड़ा जरिया बनेगी।

by Kanchan Kumar
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रांची : झारखंड की राजधानी रांची के लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। रांची रिंग रोड को अब एक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल ‘ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर’ के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। आने वाले समय में यह रोड न सिर्फ गाड़ियों के चलने के काम आएगी, बल्कि पर्यावरण को बचाने और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने का एक बड़ा जरिया बनेगी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर पथ निर्माण विभाग ने इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। विभाग की एक टीम ने जमीन का जायजा लेने के लिए रिंग रोड का दौरा भी किया है। रांची रिंग रोड पहले से ही रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, खूंटी, गुमला और पलामू जाने वाले वाहनों के लिए बाईपास का काम करती है। भारी गाड़ियां शहर के अंदर आए बिना ही अपने रास्ते निकल जाती हैं, जिससे रांची शहर में जाम नहीं लगता। अब इस नई योजना के पूरे होने से यह रोड और ज्यादा आधुनिक, खूबसूरत और प्रदूषण मुक्त हो जाएगी।

क्या है सरकार की योजना

इस योजना के तहत रिंग रोड के दोनों किनारों पर, सर्विस रोड से सटकर लगभग 40 किलोमीटर के दायरे में कई खास सुविधाएं तैयार की जाएंगी। साइकिल चलाने के लिए एक बिल्कुल अलग और सुरक्षित रास्ता (ट्रैक) बनाया जाएगा। इससे जो लोग साइकिल से चलते हैं, उन्हें बड़ी गाड़ियों के बीच चलने का डर नहीं रहेगा।

राहगीरों के सुरक्षित चलने के लिए अच्छे फुटपाथ बनाए जाएंगे। सड़क के किनारे सोलर पैनल और सोलर रूफ (सूरज की रोशनी से बिजली बनाने वाली छतें) लगाई जाएंगी। इनसे जो बिजली बनेगी, उसी का इस्तेमाल रात में सड़कों पर रोशनी करने और दूसरी सरकारी सुविधाओं में किया जाएगा। इससे बिजली का खर्च बहुत कम हो जाएगा और रात में सफर भी सुरक्षित होगा। साथ ही पूरी सड़क के किनारे पेड़-पौधे और घास लगाकर इसे हरा-भरा बनाया जाएगा, जिससे प्रदूषण कम हो और पर्यावरण सुरक्षित रहे।

कब तक शुरू होगा काम

फिलहाल एक एजेंसी के जरिए रिंग रोड के आसपास की जमीन का सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के बाद पूरी योजना का नक्शा तैयार होगा और सरकार की मंजूरी मिलते ही ‘डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ (DPR) बनाई जाएगी। विभाग की कोशिश है कि अगले एक से डेढ़ महीने में यह रिपोर्ट तैयार हो जाए, ताकि बरसात का मौसम खत्म होते ही जमीन पर काम शुरू किया जा सके।

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