
रांची : झारखंड की राजधानी रांची के नगड़ी थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि वीडियो में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हटिया विधायक नवीन जायसवाल के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के एक पदाधिकारी की शिकायत पर साहेर गांव निवासी अलीम अंसारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया वीडियो को लेकर दर्ज हुई प्राथमिकी
जानकारी के अनुसार नगड़ी थाना क्षेत्र के साहेर गांव निवासी अलीम अंसारी पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा हटिया विधायक नवीन जायसवाल के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि वीडियो में जान से मारने की धमकी जैसी बातें भी कही गई हैं।
इसी आरोप के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के एक पदाधिकारी ने नगड़ी थाना में लिखित आवेदन देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। आवेदन के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच प्रारंभ कर दी है।
धार्मिक भावनाएं भड़काने का भी आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित वीडियो में ऐसी बातें कही गई हैं, जिनसे धार्मिक भावनाएं भड़क सकती हैं और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका है। आवेदनकर्ता का कहना है कि इस प्रकार की कथित टिप्पणियां कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं, इसलिए मामले में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वीडियो की सामग्री, उसकी सत्यता और आरोपों की प्रकृति क्या है।
पुलिस ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही
मामले को लेकर नगड़ी थाना पुलिस का कहना है कि शिकायत, उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित विधिक प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
यह मामला सोशल मीडिया पर साझा की गई कथित आपत्तिजनक सामग्री से जुड़ा है। ऐसे मामलों में पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, वीडियो की प्रामाणिकता और उसके प्रसार की भी जांच करती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप किस सीमा तक सही हैं और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कौन-कौन सी कानूनी धाराएं लागू होंगी।

