
रांची : झारखंड में महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज विभाग की पहल पर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क के सहयोग से शुरू किए गए झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम के तहत पहले चरण में राज्य के 150 महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को तीन वर्षों तक तकनीकी, वित्तीय और विपणन संबंधी सहयोग दिया जाएगा।
योजना के तहत चयनित उद्यमों को व्यवसाय मूल्यांकन, मेंटोरिंग, क्षमता निर्माण, गुणवत्ता प्रमाणन, वित्तीय संस्थानों और बाजार से जुड़ाव, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स, ब्रांडिंग तथा व्यवसाय विस्तार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए रांची में केंद्रीय हब और संभागीय स्तर पर पांच क्षेत्रीय स्पोक स्थापित किए जाएंगे, ताकि राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक भी गुणवत्तापूर्ण सहायता पहुंच सके।
विभाग ने सखी सिल्क के वेब पोर्टल को भी सार्वजनिक किया है। इस पहल से गोड्डा और दुमका के भगैया सिल्क बुनकरों तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध होगा। अब तक भगैया सिल्क को भागलपुर सिल्क के नाम से पहचान मिलती रही, लेकिन जीआई टैग मिलने के बाद अब झारखंड के बुनकरों को उनकी वास्तविक पहचान और मेहनत का उचित सम्मान मिलेगा।
राज्य की महिला देश भर में बना रही अलग पहचान
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि झारखंड अब केवल खनिज संपदा के लिए नहीं, बल्कि महिला उद्यमिता, नवाचार और सफल ग्रामीण उद्यमों के लिए भी देशभर में अपनी अलग पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल 150 उद्यमों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में इस पहल का विस्तार कर जेएसएलपीएस से जुड़े 1.54 लाख से अधिक उद्यमों को चरणबद्ध तरीके से बाजार, तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

