
रांची : झारखंड सरकार का वाणिज्य कर विभाग राज्य में पुराने बकाया कर मामलों के निपटारे के लिए ‘झारखंड कराधान अधिनियमों की बकाया राशि का समाधान अधिनियम, 2026’ लाने की तैयारी कर रहा है। विभाग ने प्रस्तावित अधिनियम का प्रारूप तैयार कर आम लोगों, व्यापारियों और अन्य हितधारकों से 19 जून तक सुझाव मांगे हैं।
स्तावित अधिनियम में जीएसटी को शामिल नहीं किया गया है। यह कानून मुख्य रूप से जीएसटी लागू होने से पहले के पुराने कर कानूनों के तहत लंबित बकाया और विवादों के निपटारे के लिए लाया जा रहा है। इसके दायरे में बिहार वित्त अधिनियम, 1981 के तहत लगने वाला सेल्स टैक्स, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 के तहत सीएसटी, झारखंड वैट अधिनियम, 2005 के तहत वैट, बिजली शुल्क, लक्जरी टैक्स, विज्ञापन कर, प्रोफेशनल टैक्स, मनोरंजन-कर तथा प्रवेश-कर से जुड़े मामले शामिल हैं।
प्रस्तावित अधिनियम का उद्देश्य इन पुराने और विवादित कर मामलों का एकमुश्त समाधान करना है। विभाग का मानना है कि इससे वर्षों से लंबित कर विवादों के निपटारे में तेजी आएगी और व्यापारियों के साथ-साथ अन्य करदाताओं को भी राहत मिलेगी। विभाग के अनुसार, प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद प्रारूप में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद इसे मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा और मंजूरी मिलने के बाद पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
मूल बकाया राशि जमा करनी होगी, ब्याज जुर्माने पर मिलेगी छूट
प्रारूप के अनुसार, स्वीकृत कर बकाया के मामलों में मूल कर की पूरी राशि जमा करनी होगी, जबकि ब्याज और जुर्माने में 95 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। वहीं 30 जून 2017 तक के आकलित कर बकाया मामलों में केवल 30 प्रतिशत कर राशि का भुगतान करना होगा और शेष 70 प्रतिशत राशि माफ करने का प्रावधान रखा गया है। घोषणा पत्र, प्रपत्र और प्रमाण-पत्र से जुड़े मामलों में 35 प्रतिशत राशि जमा करने पर 65 प्रतिशत राशि माफ की जा सकेगी। विवादित कर मामलों में भी केवल 30 प्रतिशत कर राशि का भुगतान कर 70 प्रतिशत तक की छूट का लाभ मिल सकेगा।
90 दिनों के भीतर करना होगा आवेदन
अधिनियम लागू होने के 90 दिनों के भीतर बकाया कर मामलों के निपटारे के लिए आवेदन करना होगा।
विशेष परिस्थितियों में वाणिज्य कर आयुक्त आवेदन की अवधि को अधिकतम 30 दिन तक बढ़ा सकेंगे।
प्रत्येक कर आदेश (स्टैट्यूटरी ऑर्डर) के लिए अलग-अलग आवेदन देना होगा।
आवेदक को यह जानकारी देनी होगी कि संबंधित मामले में कोई अपील, पुनरीक्षण या अन्य याचिका किसी प्राधिकरण या न्यायालय में लंबित है या नहीं।
इस तरह होगा निपटारा
5 लाख रुपये तक के मामलों का निपटारा राज्य कर पदाधिकारी करेंगे।
10 लाख रुपये तक के मामलों का निपटारा सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारी करेंगे।
50 लाख रुपये तक के मामलों की सुनवाई उप आयुक्त स्तर के अधिकारी करेंगे।
50 लाख रुपये से अधिक के मामलों का निपटारा संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी करेंगे।
आवेदन में कोई कमी होने पर विभाग 15 दिनों के भीतर नोटिस जारी करेगा और आवेदक को कमी दूर करने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा।
आवेदन पूरी तरह सही पाए जाने पर विभाग 30 दिनों के भीतर निपटारे का आदेश जारी करेगा।

