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यात्रा वृतांत : गंगटोक : हर मोड़ पर मुस्कुराती प्रकृति

दैनिक समाचार पत्र द फोटोन न्यूज के साहित्य पेज के लिए लिखे गए कॉलम : घुमक्कड़ की पाती से साभार

by Sanjaya Shepherd
यात्रा वृतांत
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र्मियों की तपती दोपहरों से राहत पाने के लिए जब मैंने किसी ठंडी और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर जगह की तलाश शुरू की, तो मन बार-बार सिक्किम की राजधानी गंगटोक की ओर खिंचता चला गया। हिमालय की गोद में बसा यह शहर लंबे समय से मेरी यात्रा सूची में शामिल था। आखिरकार जून के शुरुआती दिनों में मैंने दिल्ली से गंगटोक की यात्रा का कार्यक्रम बनाया। यह केवल एक पर्यटन यात्रा नहीं थी, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और पहाड़ी जीवन को करीब से महसूस करने का अवसर भी था।

दिल्ली से मेरी यात्रा हवाई मार्ग से शुरू हुई। सुबह की उड़ान से मैं बागडोगरा हवाई अड्डे पहुंचा। विमान से उतरते ही मौसम में बदलाव साफ महसूस होने लगा। दिल्ली की गर्म हवा की जगह ठंडी और नम हवा ने स्वागत किया। बागडोगरा से गंगटोक की लगभग 125 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए मैंने शेयर- टैक्सी का विकल्प चुना। पहाड़ों की ओर बढ़ते ही रास्ते का दृश्य लगातार बदलने लगा। घुमावदार सड़कें, दूर-दूर तक फैली हरियाली और साथ-साथ बहती तीस्ता नदी पूरे सफर को रोमांचक बना रही थीं।

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करीब चार घंटे की यात्रा के बाद मैं गंगटोक पहुंचा। शहर में प्रवेश करते ही साफ-सुथरी सड़कें, अनुशासित यातायात और पहाड़ी ढलानों पर बने रंग-बिरंगे घर मन मोह लेने वाले थे। होटल पहुंचकर कुछ देर विश्राम करने के बाद मैं शहर की सबसे प्रसिद्ध जगह एम.जी. मार्ग की ओर निकल पड़ा। यह गंगटोक का प्रमुख बाजार है, जहां वाहनों का प्रवेश नहीं है। शाम के समय यहां पर्यटकों की चहल-पहल, सजी हुई दुकानें और पहाड़ी वातावरण का अलग ही आनंद था।

अगले दिन मैंने गंगटोक के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सैर शुरू की। सबसे पहले मैं त्सोमगो झील पहुंचा। समुद्र तल से लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह झील हिमालयी पर्वतों से घिरी हुई है। झील का नीला पानी और उसके आसपास फैले बादल किसी चित्रकार की कल्पना जैसे लग रहे थे। यहां याक की सवारी करने का अवसर भी मिला, जो पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। ठंडी हवा और शांत वातावरण ने इस स्थान को मेरी यात्रा का सबसे यादगार पड़ाव बना दिया।

त्सोमगो झील के बाद मैं नाथू-ला दर्रे की ओर बढ़ा। भारत-चीन सीमा पर स्थित यह स्थान देशभक्ति और रोमांच दोनों का अनोखा अनुभव कराता है। सेना के जवानों की तैनाती और ऊंचे पर्वतों के बीच खड़े होकर मैंने महसूस किया कि प्रकृति और राष्ट्र की सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। वहां बिताए गए कुछ घंटे हमेशा स्मृति में रहेंगे।

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गंगटोक में केवल प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि रोमांचक गतिविधियों की भी भरपूर संभावनाएं हैं। मैंने रोपवे की सवारी का आनंद लिया, जहां से पूरा शहर और आसपास की पहाड़ियां दिखाई देती हैं। ऊंचाई से दिखाई देने वाला गंगटोक किसी जीवंत चित्र की तरह प्रतीत हो रहा था। इसके अलावा स्थानीय ट्रैवल एजेंसियों द्वारा आयोजित छोटी ट्रेकिंग गतिविधियों में भी भाग लिया, जिससे पहाड़ी जीवन को करीब से देखने का अवसर मिला।

यात्रा के दौरान ठहरने की व्यवस्था भी बेहद संतोषजनक रही। गंगटोक में बजट होटल से लेकर लक्ज़री रिसॉर्ट तक सभी प्रकार के विकल्प उपलब्ध हैं। मैंने एम.जी. मार्ग के निकट एक मध्यम बजट होटल चुना, जहां से शहर के अधिकांश आकर्षण आसानी से पहुंच में थे। होटल की खिड़की से दिखाई देने वाले बादलों और पहाड़ों का दृश्य हर सुबह को विशेष बना देता था।

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गंगटोक की यात्रा का सबसे आकर्षक पक्ष केवल उसके प्राकृतिक दृश्य नहीं थे, बल्कि वहां की संस्कृति, खानपान और लोगों का आत्मीय व्यवहार भी था। पर्यटन स्थलों की सैर के बाद मैंने स्थानीय जीवन को समझने और महसूस करने का प्रयास किया। इसी उद्देश्य से मैं शहर के विभिन्न बाजारों और सांस्कृतिक केंद्रों तक पहुंचा। यहां नेपाली, लेपचा, भूटिया और तिब्बती समुदायों की झलक एक साथ दिखाई देती है। यही विविधता गंगटोक को अन्य पर्वतीय शहरों से अलग पहचान देती है।

एम.जी. मार्ग और उसके आसपास के क्षेत्रों में घूमते हुए मैंने स्थानीय हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र और पारंपरिक सजावटी वस्तुओं को देखा। दुकानदारों का व्यवहार बेहद विनम्र था और वे पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति के बारे में जानकारी देने में भी रुचि लेते थे। शहर की स्वच्छता और अनुशासन भी प्रभावित करने वाला था। सड़कों पर कूड़ा न के बराबर दिखाई देता था और लोग सार्वजनिक स्थानों की सफाई को लेकर बेहद सजग नजर आए।

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गरमागरम मोमोज व लजीज थुकपा

किसी भी यात्रा का वास्तविक आनंद तब मिलता है जब वहां के स्थानीय भोजन का स्वाद लिया जाए। गंगटोक में यह अनुभव भी बेहद खास रहा। मैंने सबसे पहले गरमागरम मोमोज़ का स्वाद लिया, जो यहां लगभग हर गली और रेस्तरां में उपलब्ध हैं। इनके साथ परोसी जाने वाली तीखी चटनी स्वाद को और भी यादगार बना देती है। इसके अलावा थुकपा नामक पारंपरिक नूडल सूप का स्वाद भी लिया। ठंडे मौसम में यह व्यंजन शरीर को गर्माहट देने के साथ-साथ स्वाद का अनोखा अनुभव प्रदान करता है। एक स्थानीय रेस्तरां में मैंने फाग्शापा और गुन्द्रुक जैसे पारंपरिक व्यंजनों का भी स्वाद चखा, जिनसे सिक्किम की खानपान संस्कृति को समझने का अवसर मिला।

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यात्रा के दौरान मुझे स्थानीय लोगों से बातचीत करने का अवसर भी मिला। उन्होंने बताया कि गंगटोक का जीवन प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलता है। यहां के लोग पर्यावरण संरक्षण को अपनी संस्कृति का हिस्सा मानते हैं। यही कारण है कि शहर आज भी अपनी स्वच्छता और प्राकृतिक सुंदरता को काफी हद तक सुरक्षित रखे हुए है। शाम के समय स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पारंपरिक संगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियां देखना भी एक सुखद अनुभव रहा। इन प्रस्तुतियों में सिक्किम की सांस्कृतिक विरासत और जीवन शैली की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।

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गंगटोक में बिताए गए पांच दिन कब बीत गए, इसका एहसास ही नहीं हुआ। हर सुबह नई जगह देखने का उत्साह और हर शाम पहाड़ों के बीच ढलते सूरज का दृश्य मन में नई ऊर्जा भर देता था। आखिरी दिन जब होटल की बालकनी से दूर दिखाई दे रही पहाड़ियों और बादलों को निहार रहा था, तब मन में एक अजीब-सी भावुकता थी। ऐसा लग रहा था, मानो यह शहर मुझे फिर लौट आने का निमंत्रण दे रहा हो।

वापसी के दिन मैं सुबह गंगटोक से बागडोगरा के लिए रवाना हुआ। रास्ते भर तीस्ता नदी मेरे साथ-साथ बहती रही। पहाड़ धीरे-धीरे पीछे छूटते गए और मैदानों का विस्तार शुरू हो गया। बागडोगरा हवाई अड्डे पहुंचकर जब मैंने दिल्ली की उड़ान पकड़ी, तब मन में गंगटोक की अनगिनत स्मृतियां ताजा थीं। कुछ घंटों बाद मैं फिर दिल्ली की भागदौड़ और व्यस्त जीवन के बीच था, लेकिन मन अब भी हिमालय की वादियों में भटक रहा था।

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यह यात्रा मेरे लिए केवल एक पर्यटन अनुभव नहीं थी, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और जीवन की सरलता को समझने की एक सीख भी थी। गंगटोक ने मुझे सिखाया कि वास्तविक आनंद केवल बड़े शहरों की चमक-दमक में नहीं, बल्कि उन शांत पहाड़ियों, स्वच्छ वातावरण और मुस्कुराते चेहरों में भी छिपा होता है, जहां जीवन अपनी सहज गति से बहता है। दिल्ली लौटने के बाद भी त्सोमगो झील का नीला जल, नाथू ला की ऊँचाइयाँ, एम.जी. मार्ग की रौनक और मोमोज़ की खुशबू बार-बार स्मृतियों में लौट आती है। यही कारण है कि गंगटोक की यह यात्रा मेरे जीवन की सबसे सुंदर और यादगार यात्राओं में हमेशा शामिल रहेगी।

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