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Jharkhand Police: DGP नियुक्ति नियमावली विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अब 7 सितंबर को सुनवाई, अंग्रेजों के बनाए कानून का हो रहा अनुपालन!

झारखंड सरकार पर आरोप है कि उसने अपनी एक नई ‘DGP चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2024’ तैयार कर ली।

by Kanchan Kumar
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​रांची : झारखंड में नए पुलिस महानिदेशक के चयन और इससे जुड़े नियमों को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट में इस हाई-प्रोफाइल मामले पर बुधवार को होने वाली सुनवाई टल गई है। अब इस पूरे प्रकरण पर अदालत आगामी सोमवार यानी 7 सितंबर को सुनवाई करेगी।

बुधवार को जैसे ही देश के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ में मामले की कार्यवाही शुरू हुई, झारखंड सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने पीठ को बताया कि कोर्ट द्वारा नियुक्त ‘एमिकस क्यूरी’ ने जो रिपोर्ट तैयार की है, उसकी प्रति राज्य सरकार को नहीं मिली है। रिपोर्ट के अध्ययन के बिना इस विषय पर बहस करना संभव नहीं होगा।

​सिब्बल ने मांगी रिपोर्ट की कॉपी

​सिब्बल ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें रिपोर्ट की कॉपी मुहैया कराई जाए और सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस मांग को स्वीकार करते हुए एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने का निर्देश दिया और अगली तारीख 7 सितंबर तय कर दी।

​विवाद की असली वजह, नियम और प्रक्रिया पर सवाल

झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति का यह मामला लंबे समय से कानूनी दांव-पेच में फंसा हुआ है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में देश भर में डीजीपी की नियुक्ति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए थे, जिसके तहत अधिकारियों के नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग को भेजना अनिवार्य है।

​हालांकि, झारखंड सरकार पर आरोप है कि उसने इन सुप्रीम निर्देशों से अलग हटकर अपनी एक नई ‘DGP चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2024’ तैयार कर ली। इस नियमावली को बनाने के लिए सरकार ने ब्रिटिश काल के पुराने पुलिस कानूनों और धाराओं का सहारा लिया। इसी नए नियम के आधार पर राज्य में अनुराग गुप्ता और बाद में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति की गई।

​अवमानना नोटिस और कानूनी लड़ाई

प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन न करने पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है कि आखिर यूपीएससी को अधिकारियों के नाम क्यों नहीं भेजे गए। ​वहीं, भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार द्वारा बनाए गए इन नियमों की वैधता को अदालत में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट से यह मामला सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित होने के बाद से शीर्ष अदालत इसकी बारीकी से समीक्षा कर रही है। अब सभी की निगाहें 7 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट पर मुख्य बहस होगी।

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