
रांची : डोरंडा-नामकुम पथ चौड़ीकरण से जुड़े मुआवजा विवाद की अवमानना याचिका पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने पिछले आदेश के बावजूद भूमि अधिग्रहण से संबंधित मूल अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई।
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड नहीं सौंपे जाने से अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं और गैर-रैयतों को अनुचित लाभ पहुंचाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने रांची के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को 27 जुलाई को फिर सशरीर उपस्थित होकर भूमि अधिग्रहण से जुड़े सभी मूल दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया। यह मामला 13 वर्ष पुराने भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा विवाद से संबंधित है।
एनएच भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले की अवमानना याचिका समाप्त
झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग में राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा भुगतान मामले में दायर अवमानना याचिका का निष्पादन कर दिया। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि स्वीकृत मुआवजे का भुगतान याचिकाकर्ता को किया जा चुका है, इसलिए अवमानना की कार्यवाही जारी रखने का कोई आधार नहीं है।
विजय साव की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2025 के हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बैंक लेन-देन का ब्योरा पेश कर बताया कि मुआवजे की राशि याचिकाकर्ता और सह-हिस्सेदार रूबी देवी के खाते में भेज दी गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने भी राशि मिलने की पुष्टि की, हालांकि अधिक मुआवजे का दावा किया। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त मुआवजे की मांग के लिए याचिकाकर्ता कानून के तहत उपलब्ध अन्य उचित कानूनी उपाय अपना सकते हैं।
Read Also : Jharkhand News: झारखंड में सरकारी मुकदमों के डिजिटल प्रबंधन को मिलेगी नई रफ्तार,विधि पोर्टल लांच

