
साहिबगंज : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया के बीच साहिबगंज जिले के उधवा अंचल में जाति और निवास प्रमाणपत्र बनवाना लोगों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। प्रमाणपत्र के आवेदन का प्रारूप बार-बार बदले जाने से हजारों आवेदन लंबित पड़े हैं। अब वंशावली के सत्यापन को लेकर जारी नए निर्देश ने आवेदकों के साथ पंचायत प्रतिनिधियों की परेशानी भी बढ़ा दी है।
बार-बार बदला जा रहा प्रमाणपत्र का प्रारूप
उधवा में एसआईआर के लिए जाति एवं निवास प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन जमा किए। बताया जा रहा है कि अंचल स्तर पर आवेदन के प्रारूप में कई बार बदलाव किया गया। पहले जारी प्रारूप पर आवेदन लेने के बाद उसे बदल दिया गया। नए प्रारूप पर आवेदन जमा किए गए, लेकिन बाद में वह व्यवस्था भी कारगर साबित नहीं हुई। इससे लोगों को आवश्यक दस्तावेज जुटाकर बार-बार अंचल कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े।
हजारों आवेदन लंबित, एसआईआर प्रक्रिया प्रभावित
आवेदनों का समय पर निष्पादन नहीं होने के कारण हजारों मामले लंबित हो गए। इसका असर एसआईआर से संबंधित कार्यों पर भी पड़ने लगा। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्णय के बाद केवल एसआईआर के उद्देश्य से ऑफलाइन जाति और निवास प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इन प्रमाणपत्रों को सिर्फ एसआईआर के लिए मान्य रखते हुए उनकी वैधता तीन महीने निर्धारित की गई थी।
बाद में राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रवि कुमार ने तीन महीने की वैधता और केवल एसआईआर के लिए प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था को गलत बताया। इसके बाद संबंधित कार्यालय को एक बार फिर प्रारूप में संशोधन करना पड़ा।
तीसरी बार जारी हुआ नया प्रारूप
अंचल कार्यालय की ओर से तीसरी बार जारी नए प्रारूप में प्रमाणपत्र को सभी आवश्यक कार्यों के लिए मान्य किए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, आवेदन करने वाले लोगों का कहना है कि लगातार बदलाव से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आवेदकों को यह भरोसा नहीं हो पा रहा कि नए प्रारूप पर जमा किया गया आवेदन स्वीकार होगा या उन्हें दोबारा दस्तावेज देने पड़ेंगे।
26 पंचायतों के लिए केवल दो राजस्व कर्मचारी
उधवा अंचल की 26 पंचायतों में बड़ी संख्या में लोगों को एसआईआर के लिए जाति और निवास प्रमाणपत्र की आवश्यकता है, जबकि यहां केवल दो राजस्व कर्मचारी कार्यरत बताए जा रहे हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण सत्यापन और आवेदन निष्पादन की गति प्रभावित हो रही है।
गलत वंशावली पर मुखिया की तय होगी जिम्मेदारी
नए आदेश के अनुसार वंशावली का सत्यापन संबंधित मुखिया या वार्ड सदस्य को करना होगा। सत्यापन गलत पाए जाने पर मुखिया को जिम्मेदार माना जाएगा। इस प्रावधान से पंचायत प्रतिनिधि भी सावधानी बरत रहे हैं, जिससे प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया और कठिन हो सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से स्पष्ट, स्थायी और सरल व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि लंबित आवेदनों का शीघ्र निपटारा हो सके।

