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Turmeric Milk Benefits : क्या हल्दी वाला दूध सच में तेजी से भरता है चोट? सामने आई सच्चाई

by Rakesh Pandey
Turmeric Milk Benefits
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जमशेदपुर : हल्दी वाला दूध भारतीय घरों में लंबे समय से पारंपरिक घरेलू पेय के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। सर्दी-जुकाम, शरीर में दर्द या मामूली चोट लगने पर अक्सर बुजुर्ग इसे पीने की सलाह देते हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की डाइटिशियन अन्नु सिन्हा के अनुसार, हल्दी और दूध में मौजूद पोषक तत्व शरीर की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया को सहारा दे सकते हैं। हालांकि, इसे किसी चोट या बीमारी का मुख्य उपचार नहीं समझना चाहिए।

करक्यूमिन में पाए जाते हैं एंटीऑक्सीडेंट गुण

डाइटिशियन अन्नु सिन्हा बताती हैं कि हल्दी में करक्यूमिन नामक सक्रिय तत्व पाया जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण होते हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव कम करने तथा सामान्य सूजन को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं। दूसरी ओर, दूध से शरीर को प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। इस कारण सीमित मात्रा में हल्दी वाला दूध संतुलित आहार का उपयोगी हिस्सा बन सकता है।

रिकवरी में पोषण की अहम भूमिका

किसी चोट के बाद शरीर को क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत के लिए पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन और खनिजों की आवश्यकता होती है। दूध में मौजूद प्रोटीन इस प्रक्रिया में सहयोग कर सकता है। अन्नु सिन्हा के मुताबिक, केवल हल्दी वाला दूध पीने से घाव तुरंत ठीक होने का दावा सही नहीं है, लेकिन पौष्टिक भोजन के साथ इसका सेवन शरीर की सामान्य रिकवरी को समर्थन दे सकता है।
गंभीर चोट, गहरे घाव, संक्रमण, लगातार सूजन या तेज दर्द होने पर घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सक से जांच कराना आवश्यक है। विशेष रूप से मधुमेह के रोगियों में घाव देर से भर सकता है, इसलिए उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के घाव पर सीधे हल्दी या कोई अन्य पदार्थ नहीं लगाना चाहिए।

हल्दी वाला दूध तैयार करने का सही तरीका

एक कप गुनगुने दूध में लगभग एक चौथाई से आधा चम्मच हल्दी मिलाकर इसका सेवन किया जा सकता है। स्वाद और हल्दी के बेहतर अवशोषण के लिए इसमें थोड़ी-सी काली मिर्च मिलाई जा सकती है। अधिक मात्रा में हल्दी डालने से पेट में जलन, मितली या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है, इसलिए संयम जरूरी है।

इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी

डाइटिशियन अन्नु सिन्हा के अनुसार, दूध से एलर्जी या लैक्टोज असहिष्णुता वाले लोगों को इससे बचना चाहिए। पित्ताशय, किडनी, पेट संबंधी समस्या से परेशान या खून पतला करने वाली दवा लेने वाले व्यक्ति डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका सेवन करें।
अन्नु सिन्हा का कहना है कि हल्दी वाला दूध कोई चमत्कारी इलाज नहीं, बल्कि संतुलित आहार के साथ लिया जाने वाला सहायक पेय है। बेहतर रिकवरी के लिए पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम और समय पर चिकित्सकीय उपचार सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

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