
रांची: झारखंड में सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे पारा शिक्षकों को फिलहाल अदालत से कोई तात्कालिक राहत नहीं मिल पाई है। झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में ऋषिकांत तिवारी और अन्य पारा शिक्षकों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में बैठने के लिए कोई अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।
हालांकि, अदालत ने नरमी बरतते हुए याचिकाकर्ताओं को यह कानूनी छूट दी है कि वे अपना पक्ष रखते हुए शिक्षा विभाग को एक मेमोरेंडम सौंप सकते हैं।
पारा शिक्षकों और जेएसएससी का पक्ष
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पारा शिक्षकों की ओर से दलील दी गई कि वे इंटरमीडिएट ट्रेड टीचर कक्षा 1 से 5 की आगामी परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं। उनका कहना था कि भले ही उन्होंने अभी तक जेटेट या पड़ोसी राज्यों की टेट/सीटेट परीक्षा पास नहीं की है, लेकिन उन्हें परीक्षा में आवेदन की अनुमति दी जाए। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वे नौकरी मिलने के बाद तयशुदा तीन साल के भीतर जेटेट परीक्षा पास कर लेंगे।
दूसरी तरफ, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत को बताया कि प्रार्थी विज्ञापन में तय नियमों और शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। विज्ञापन के मुताबिक, वही अभ्यर्थी पात्र हैं जो या तो जेटेट पास हैं या फिर अन्य राज्यों से टेट/सीटेट पास कर चुके हैं। आयोग का यह भी तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट के ‘सुनील यादव मामले’ में आए आदेश के आलोक में ही यह विज्ञापन जारी किया गया है, इसलिए नियमों के विरुद्ध जाकर किसी को छूट देना संभव नहीं है।
आवेदन की अंतिम तारीख करीब
मालूम हो कि जेएसएससी द्वारा विज्ञापन संख्या 4/26 के तहत इंटरमीडिएट ट्रेड टीचर (कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8) के लिए 5,000 से अधिक पदों पर बंपर भर्तियां निकाली गई हैं। इस परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। तारीख नजदीक होने के कारण प्रभावित पारा शिक्षकों की धड़कनें तेज हो गई हैं, और अब उनकी नजरें पूरी तरह से शिक्षा विभाग के रुख पर टिकी हैं।
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