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Jharkhand Doctors Strike : झारखंड में 22 अक्टूबर से डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 10 चिकित्सा संगठनों ने खोला मोर्चा; आपात सेवाएं रहेंगी जारी

राज्य में डॉक्टरों के इस संयुक्त आंदोलन का उद्देश्य केवल चिकित्सकों की मांगों को उठाना नहीं, बल्कि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करना भी है

by Rakesh Pandey
Jharkhand Doctors Strik
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रांची : झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर डॉक्टरों ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। राज्य के 10 प्रमुख चिकित्सा संगठनों ने एकजुट होकर सरकार से डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की झारखंड शाखा के नेतृत्व में शुरू किए गए इस संयुक्त आंदोलन के तहत 22 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान किया गया है। हालांकि, चिकित्सा संगठनों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान आपातकालीन और जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाएं जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को इलाज मिलने में परेशानी न हो।

डॉक्टरों का कहना है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए चिकित्सकों की समस्याओं का समाधान करना जरूरी है। इसके साथ ही अस्पतालों में जरूरी संसाधनों की उपलब्धता, चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के भुगतान से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। संगठनों ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध समाधान निकालने की अपील की है।

झारखंड में डॉक्टरों का आंदोलन क्यों हो रहा है?

राज्य में डॉक्टरों के इस संयुक्त आंदोलन का उद्देश्य केवल चिकित्सकों की मांगों को उठाना नहीं, बल्कि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करना भी है। चिकित्सा संगठनों ने डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पतालों की सुविधाओं, चिकित्सकों की कमी और चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी प्रशासनिक समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाया है। संगठनों का मानना है कि अस्पतालों में डॉक्टरों को सुरक्षित माहौल मिलने से वे बिना किसी भय के मरीजों का इलाज कर सकेंगे। वहीं, चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक उपकरणों और संसाधनों की उपलब्धता बढ़ने से उपचार की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। डॉक्टरों ने सरकार से इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

डॉक्टरों की सुरक्षा और अस्पतालों में बेहतर सुविधाओं की मांग

चिकित्सा संगठनों ने डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को आंदोलन का महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया है। अस्पतालों में चिकित्सकों के साथ हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था करने की मांग की गई है। संगठनों का कहना है कि सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि डॉक्टर बिना दबाव के मरीजों को चिकित्सा सेवाएं दे सकें। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। चिकित्सा संगठनों के अनुसार, अस्पतालों में जरूरी संसाधनों की कमी और कार्यस्थल से जुड़ी समस्याओं का असर मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ सकता है। इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए डॉक्टरों की सुरक्षा के साथ अस्पतालों की सुविधाओं में सुधार भी जरूरी है।

आयुष्मान भारत योजना के भुगतान और पैकेज दरों का मुद्दा

डॉक्टरों के आंदोलन में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े भुगतान संबंधी मामले भी शामिल हैं। चिकित्सा संगठनों ने योजना के तहत अस्पतालों को समय पर भुगतान करने, उपचार की उचित पैकेज दर निर्धारित करने और लंबित बकाया राशि का निपटारा करने की मांग उठाई है। संगठनों का कहना है कि भुगतान में देरी और बकाया राशि से जुड़ी समस्याओं का समाधान जरूरी है। समय पर भुगतान होने से योजना के तहत मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों को सेवाएं जारी रखने में मदद मिल सकती है। चिकित्सा संगठनों ने सरकार से इस विषय पर ठोस पहल करने की अपील की है, ताकि मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रभावित न हो।

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भर्ती और मेडिकल शिक्षा में सुधार

झारखंड में सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने और नियमित भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है। संगठनों ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध रहने से मरीजों को समय पर उपचार देने में मदद मिलेगी।

मेडिकल शिक्षा से जुड़े मुद्दों को भी संयुक्त आंदोलन में शामिल किया गया है। चिकित्सा संगठनों ने मेडिकल छात्रों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक माहौल, बेहतर प्रशिक्षण और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग की है। इसके अलावा अस्पतालों से जुड़ी लाइसेंस प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं को सरल बनाने की जरूरत भी बताई गई है। संगठनों का कहना है कि अनावश्यक कागजी प्रक्रियाओं में समय खर्च होने के बजाय चिकित्सा संस्थानों को मरीजों की सेवा पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलना चाहिए।

22 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार

लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के विरोध में चिकित्सा संगठनों ने 22 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। संगठनों के अनुसार, मांगों के समाधान के लिए प्रयास किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन किया जाएगा। हालांकि, इस आंदोलन के दौरान आपातकालीन और जीवनरक्षक सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को जरूरी उपचार से वंचित न होना पड़े। इस घोषणा के साथ चिकित्सा संगठनों ने मरीजों के हितों को भी प्राथमिकता देने की बात कही है।

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