
जमशेदपुर : पेशाब में जलन, लगातार झाग या रंग बदलने जैसी शिकायतों को मामूली मानकर टालना परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि हर बदलाव किडनी की बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन बार-बार होने वाली समस्या की जांच जरूरी है। किडनी की शुरुआती बीमारी कई बार बिना स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद रहती है। इसलिए केवल पेशाब का रंग देखकर उसकी सेहत का अंदाजा लगाना पर्याप्त नहीं है।
जमशेदपुर के जाने-माने यूरोलॉजिस्ट डॉ. हरप्रीत सिंह के अनुसार, पेशाब में बदलाव का कारण पानी की कमी, संक्रमण, पथरी, दवाओं का असर या मूत्रमार्ग से जुड़ी दूसरी परेशानी भी हो सकती है। सही कारण पहचानने के लिए लक्षणों और जांच रिपोर्ट को साथ देखना जरूरी है।
झाग बार-बार बने तो जांच कराएं
कभी-कभार पेशाब में झाग दिखना सामान्य हो सकता है। लेकिन लगातार अधिक झाग बनने पर पेशाब में प्रोटीन की जांच की जरूरत पड़ सकती है। किडनी के फिल्टर प्रभावित होने पर एल्ब्यूमिन जैसे प्रोटीन पेशाब में आने लगते हैं। हालांकि केवल झाग देखकर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
खून और गहरे रंग को न करें अनदेखा
पेशाब गुलाबी, लाल या भूरा दिखाई दे तो चिकित्सकीय सलाह लें। इसकी वजह संक्रमण, पथरी अथवा दूसरी समस्या हो सकती है। कुछ खाद्य पदार्थ और दवाएं भी रंग बदल सकती हैं। गहरा पीला रंग पानी की कमी से हो सकता है, लेकिन लगातार चाय जैसा भूरा पेशाब आने पर उसे सिर्फ निर्जलीकरण समझकर टालना ठीक नहीं है। डॉ. हरप्रीत सिंह के अनुसार, रंग बदलने के साथ दर्द, बुखार या कमजोरी हो तो जल्द जांच करानी चाहिए।
मात्रा में बदलाव और रात में बार-बार उठना
सामान्य से बहुत कम पेशाब आना पानी की कमी या पेशाब के रास्ते में रुकावट से जुड़ा हो सकता है। अधिक पेशाब आने के पीछे डायबिटीज, ज्यादा तरल पदार्थ या कुछ दवाएं हो सकती हैं। रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पुरुषों में प्रोस्टेट सहित कई कारणों से होता है। इन शिकायतों को सीधे किडनी खराब होने का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
जलन के साथ बुखार हो तो बढ़ाएं सतर्कता
पेशाब करते समय जलन, दर्द और बार-बार जाने की इच्छा मूत्रमार्ग संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं। इनके साथ बुखार, ठंड लगना, पीठ या कमर के एक तरफ दर्द और उल्टी हो तो संक्रमण किडनी तक पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में शीघ्र उपचार जरूरी है।
अनुमान नहीं, जांच बताएगी स्थिति
डॉ. हरप्रीत सिंह के अनुसार, जरूरत के मुताबिक यूरिन रूटीन, संक्रमण के लिए कल्चर, यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात, रक्त में क्रिएटिनिन और ईजीएफआर की जांच कराई जा सकती है। चिकित्सक आवश्यक समझें तो अल्ट्रासाउंड भी कराते हैं। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को नियमित चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। पेशाब बिल्कुल बंद हो जाए या तेज दर्द हो तो तत्काल अस्पताल पहुंचें। किडनी का आकलन करने में रक्त और पेशाब की जांच अहम हैं।

