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Jharkhand Politics: कांग्रेस-झामुमो के रिश्तों में कड़ुवाहट के बीच सरकार की सेहत पर सवाल

असम विधानसभा चुनाव को लेकर बदल रहे हैं झारखंड के सियासी समीकरण, सीएम हेमंत सोरेन को सुझाया गया नई सरकार का फार्मूला, फूंक-फूंक कर कदम रख रहे मुख्यमंत्री

by Mujtaba Haider Rizvi
Jharkhand JMM and congress alliance
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Jamshedpur : झारखंड में कांग्रेस और झामुमो के रिश्तों में कड़वाहट आ गई है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने झामुमो को भाव नहीं दिया था। खटास तभी से शुरू हो गई थी। अब असम में भी इन दोनों दलों के बीच किसी तरह का समझौता नहीं होने पर झामुमो के नेता कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं। ऐसी हालत में झारखंड में सरकार में खींचतान के संकेत हैं।
ऐसे में सरकार की सेहत पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि क्या कांग्रेस सरकार में बनी रहेगी या झामुमो कोई ऐसा रास्ता तलाश रही है जिसमें बिना कांग्रेस के सरकार बनाई जा सके।
राजनीतिक गणितबाजों का मानना है की झामुमो के पास अपने 34 विधायक हैं। यह एक मजबूत आंकड़ा है। इसके बलबूते सरकार कांग्रेस के बिना भी झारखंड में अपनी सत्ता कायम रख सकती है। सूत्र बताते हैं कि अंदर ही अंदर जेएमएम और कांग्रेस के बीच खटास बढ़ रही है। झामुमो के सामने भाजपा के साथ गठबंधन भी एक रास्ता है। लेकिन, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि ऐसा नहीं होगा। हेमंत सोरेन इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। उन्हें भाजपा पर भरोसा नहीं है।

क्या है जदयू का फार्मूला

ऐसे में अन्य विकल्पों पर विचार चल रहा है। सूत्रों की मानें तो राजग गठबंधन के जदयू विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक फार्मूला दिया है। इसमें उन्होंने बताया है कि झामुमो बिना कांग्रेस के भी सरकार चला सकती है। विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बहुमत का आंकड़ा समझाने की भी कोशिश की है। बताया जा रहा है कि इस रणनीति के मुताबिक झामुमो के अपने 34 विधायकों के अलावा राष्ट्रीय जनता दल के चार विधायक, भाकपा माले के दो विधायक और विधायक जय राम महतो को मिलाकर झामुमो 41 के आंकड़े तक पहुंच सकती है। इस फार्मूले की एक सबसे गौर करने वाली बात यह है कि विधायक सरयू राय ने झामुमो को अपना समर्थन देने की बात नहीं की है। यही बात झामुमो के नेताओं को खटक रही है।

जदयू के फार्मूले पर अमल होगा खतरनाक

लेकिन, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक लालच देने की कोशिश की है। ताकि, वह कांग्रेस के दबाव से बचते हुए नई सरकार का गठन कर लें। विश्लेषकों का मानना है कि सरयू राय के फार्मूले पर अमल करते हुए अगर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार बनाते हैं तो वह बेहद दबाव में आ जाएंगे। तब उन्हें कोई एक विधायक भी ब्लैकमेल कर सकता है और सरकार गिराने की धमकी देकर अपनी बात मनवा सकता है। राजनीति के दिग्गजों का मानना है कि ऐसी हालत में नई सरकार भाजपा के भी दबाव में रहेगी। माना जा रहा है कि भाजपा कांग्रेस को झारखंड में सत्ता से दूर करना चाहती है। इसीलिए, उन्हें यह फार्मूला सुझाया गया है। ताकि वह कांग्रेस से बचने के लिए इसे अपना लें।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर इस फार्मूले पर सरकार बनी तो वह बेहद कमजोर सरकार होगी। झारखंड में सरकार का अस्तित्व डांवांडोल हो जाएगा।

पैच अप की भी चल रही कवायद

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि झामुमो और कांग्रेस में तल्खी आने के बाद दोनों तरफ से पैच अप की कवायद भी शुरू हो गई है। नेताओं के बीच बातचीत का दौर जारी है। ताकि इस खटास को खत्म किया जा सके। इसके लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी लगातार कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इन दोनों की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो के कई दिग्गजों के साथ कई चक्र की वार्ता भी हो चुकी है।

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