RANCHI : झारखण्ड सचिवालय सेवा संघ ने सचिवालय के विभिन्न विभागों और कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत क्षेत्रीय कर्मचारियों एवं लिपिकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने की मांग को फिर से जोरदार ढंग से उठाया है। संघ ने इस संबंध में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के सचिव को पत्र भेजकर अनुरोध किया है और कहा है कि बड़ी संख्या में नवनियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों तथा सचिवालय सेवा के अन्य अधिकारियों के लिए अब भी समुचित बैठने की व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे दैनिक कार्य निष्पादन प्रभावित हो रहा है।
संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार ने बताया कि इससे पहले भी जनवरी 2026 में इस विषय पर अनुरोध किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। संघ का कहना है कि सचिवालय परिसर में जगह की कमी के कारण नए पदाधिकारियों को कार्य करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संघ के महासचिव राजेश कुमार सिंह ने भी कार्मिक सचिव से तत्काल प्रतिनियुक्ति व्यवस्था समाप्त करने का अनुरोध किया है।
850 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी व 300 कनीय सचिवालय सहायकों की हो चुकी है नियुक्ति
वर्तमान में लगभग 850 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी तथा 300 कनीय सचिवालय सहायकों की नई नियुक्ति और पदस्थापन विभिन्न विभागों में हो चुकी है। ऐसी परिस्थिति में सचिवालय में क्षेत्रीय कर्मचारियों और लिपिकों की प्रतिनियुक्ति का औचित्य नहीं रह जाता है। संघ का कहना है कि इनकी प्रतिनियुक्ति तत्काल रद्द किए जाने से न केवल सचिवालय में कार्यों में सुधार होगा, बल्कि बैठने के लिए पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही क्षेत्रीय कार्यालयों में मानवबल की कमी दूर करने में भी मदद मिलेगी। संघ ने विभिन्न विभागों और कार्यालयों में समूह ‘ग’ के कर्मियों की प्रतिनियुक्ति तत्काल समाप्त करने का अनुरोध किया है। बताया गया है कि प्रोजेक्ट भवन, नेपाल हाउस, एफएफपी भवन सहित अन्य सचिवालय से संबद्ध कार्यालयों में बड़े पैमाने पर अधिकारी और कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे हैं।
पहले भी प्रतिनियुक्ति रद्द करने का निकल चुका है। संघ ने यह भी अवगत कराया कि पूर्व में वर्ष 2014 और 2015 में विभागीय आदेश जारी कर सचिवालय के विभिन्न विभागों और कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति के आधार पर कार्यरत क्षेत्रीय कर्मचारियों एवं लिपिकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने का निर्देश दिया गया था। उस समय वर्ष 2012-13 में सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों की पर्याप्त संख्या में हुई नियुक्तियों को आधार बनाया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब भी पुरानी व्यवस्था कायम है।

