
चाईबासा: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के जैंतगढ़ से सटे ओडिशा के चंपुआ क्षेत्र में आदिवासियों के जबरन धर्मांतरण की कोशिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बरिया थाना पुलिस ने प्रचार-प्रसार के लिए लगाए गए एक अवैध धार्मिक शिविर से सात ईसाई मिशनरियों को हिरासत में लिया है। स्थानीय जाली गांव में रामनवमी के दिन मिशनरियों ने टेंट लगाकर बड़े-बड़े माइक से अपने धर्म का प्रचार शुरू किया। ग्रामीणों के अनुसार, इस दौरान वे हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कर रहे थे, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के पहुंचने पर माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थानीय लोगों ने सात मिशनरियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया, जबकि एक मिशनरी भागने में सफल रहा।
प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि मिशनरी बीमारियों से छुटकारा और बेहतर जीवन का झांसा देकर भोले-भाले आदिवासियों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए बहका रहे थे।
जिनके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई:- राजीव लोचन बेहरा, बबिता बेहरा (जाली ग्राम) – हेमलता मुंडा, सुषमा मुंडा (टांगरपड़ा ग्राम) – जयसिंह सिंकू, जेमा सिंकू (तेली टांगरपड़ा ग्राम) – मधु चातार (सारंगगढ़ ग्राम) – मंगला गागराई (राजाबसा ग्राम) – बिनती बेहरा (मैदानेकेला ग्राम)
अवैध सभा और प्रशासनिक अनुमति का अभाव
यह धार्मिक प्रचार सभा प्रशासनिक अनुमति के बिना आयोजित की गई थी। शिकायत में कहा गया कि सभा में हिंदू धर्म के खिलाफ ज़हर फैलाया जा रहा था और ईसाईयत को सर्वश्रेष्ठ बताया जा रहा था।
हिंदू जागरण मंच की प्रतिक्रिया
तन्मय दास, संगठन मंत्री, ओडिशा ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। वे इलाज, राशन और अन्य सुविधाओं के नाम पर धर्मांतरण करा रहे हैं। यह सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की साजिश है और प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

