
पलामू : नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में एक बार फिर प्रशासनिक बदलाव की आहट के बीच हलचल तेज हो गई है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) नफीस अहमद ने पद से हटने की इच्छा जताते हुए इस्तीफे की पेशकश की है। उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए कुलपति और उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजा है।
कुलपति प्रो. डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने सोमवार को रजिस्ट्रार का पत्र मिलने की पुष्टि की। हालांकि, नफीस अहमद ने तत्काल पद छोड़ने के बजाय करीब एक माह बाद जिम्मेदारी से मुक्त किए जाने की इच्छा जताई है। उनके इस्तीफे पर अंतिम निर्णय उच्च शिक्षा विभाग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा।
नफीस अहमद को वर्ष 2025 में नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय का कुलसचिव नियुक्त किया गया था। विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में कुलसचिव का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में संभावित बदलाव का असर परीक्षा, नामांकन, रिजल्ट और अन्य प्रशासनिक कार्यों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विश्वविद्यालय के कई शैक्षणिक सत्र पहले से ही निर्धारित समय से पीछे चल रहे हैं। ऐसे में रजिस्ट्रार के इस्तीफे की पेशकश ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। लंबित परीक्षाओं, नामांकन और रिजल्ट से जुड़े कार्यों की रफ्तार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय से पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले के हजारों विद्यार्थी जुड़े हुए हैं। शैक्षणिक सत्र में देरी और लंबित कार्यों को लेकर छात्र संगठन पहले भी आवाज उठा चुके हैं। अब प्रशासनिक बदलाव की संभावित स्थिति ने विश्वविद्यालय की व्यवस्था को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
वर्ष 2009 में स्थापित नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में समय-समय पर प्रशासनिक बदलाव होते रहे हैं। वर्ष 2025 में लंबे इंतजार के बाद कुलपति और कुलसचिव की नियुक्ति हुई थी। अब रजिस्ट्रार नफीस अहमद की इस्तीफे की पेशकश के बाद विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।

