
चक्रधरपुर : दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल में ठेका मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक के बाद एक हादसे गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। बीते करीब तीन वर्षों में अलग-अलग घटनाओं में चार ठेका मजदूरों की जान जा चुकी है। हर हादसे के बाद जांच और कार्रवाई की बात सामने आती है, लेकिन सवाल अब भी वही है कि आखिर ऐसी नौबत बार-बार क्यों आ रही है?
ताजा हादसा 23 अगस्त को डोंगवापोशी में हुआ, जहां रेलवे कैरेज एंड वैगन से जुड़े काम के दौरान ऊंचाई से गिरने पर गुआ निवासी समीर खान की मौत हो गई। सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी के मुताबिक घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं और ठेकेदार पर कार्रवाई की तैयारी है।
इससे पहले 10 जून 2026 को बंडामुंडा रेल यार्ड में काम के दौरान शेरफूल शेख बिजली की चपेट में आ गए थे। 30 मई को टाटानगर स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस की छत पर एसी मरम्मत कर रहे ठेका कर्मी आशीष माझी की हाईटेंशन तार की चपेट में आने से मौत हो गई थी। वहीं 8 नवंबर 2023 को सिंहपोखरिया स्टेशन पर विकास कार्य के दौरान करीब 20 फीट ऊंचाई से गिरने पर मजदूर मोरन खंडाईत की जान चली गई थी।
चार घटनाएं, अलग-अलग जगह और अलग-अलग परिस्थितियां, लेकिन हर मामले में सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल सामने आए। मजदूरों के लिए हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, सुरक्षा जूते और विद्युत सुरक्षा जैसे उपाय अनिवार्य होने चाहिए। लेकिन यदि इन इंतजामों के बावजूद हादसे हो रहे हैं या सुरक्षा में लापरवाही के आरोप लग रहे हैं, तो निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्योंकि हादसे के बाद जांच जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है अगला हादसा होने से रोकना। चार मजदूरों की मौत सिर्फ आंकड़ा नहीं है। इनके पीछे परिवार, बच्चे और अधूरे सपने हैं। अब सवाल यही है कि क्या रेल मंडल अगली मौत का इंतजार करेगा, या मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस बदलाव करेगा?
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