
अमिताभ कौशल कमेटी की जांच लगभग पूरी, सीएम हेमंत सोरेन को जल्द सौंपी जाएगी 100 पन्नों से अधिक की रिपोर्ट
पुलिस विभाग के डीडीओ रहे डीएसपी से लेकर ट्रेजरी ऑफिसर, प्रधान लेखापाल, लेखापाल और कंप्यूटर ऑपरेटरों तक घोटाले के जिम्मेदार
रांची : झारखंड के ट्रेजरी घोटाले में अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय कमेटी बोकारो जिले में ट्रेजरी घोटाले की अपनी जांच पूरी कर चुकी है। फिलहाल रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 100 पन्नों से अधिक की इस रिपोर्ट का करीब 60 से 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अगले कुछ दिनों में रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपे जाने की संभावना है।
बोकारो और हजारीबाग सहित अन्य जिलों में करोड़ों रुपये की सरकारी राशि की अवैध निकासी के इस मामले में 40 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। सूचना है कि रिपोर्ट में ऐसे अफसरों-कर्मियों को चिन्हित किया जा रहा है। इनमें ट्रेजरी ऑफिसर (टीओ), ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ), प्रधान लेखापाल, लेखापाल और कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं। पुलिस विभाग में डीडीओ की जिम्मेदारी संभालने वाले डीएसपी स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी जांची गई है। जांच में अलग-अलग स्तर पर लापरवाही और कथित संलिप्तता के संकेत मिले हैं। अब इनकी जवाबदेही तय करने की तैयारी है।नबोकारो के अलावा अन्य जिलों में हुए घोटाले की जांच फिलहाल चल रही है।
राज्य गठन के समय से खंगाले जा रहे रिकॉर्ड
इस जांच का दायरा केवल हाल के वर्षों में हुई संदिग्ध निकासी तक सीमित नहीं है। कमेटी ने वर्ष 2000 से ही संबंधित वित्तीय और सेवा अभिलेख मंगाए हैं। यानी झारखंड के गठन के समय से लेकर अब तक की वित्तीय प्रक्रिया और रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि सरकारी राशि की निकासी में गड़बड़ी कब से और किस प्रक्रिया के तहत होती रही। किन स्तरों पर नियमों की अनदेखी हुई और लंबे समय तक ऐसी अनियमितताएं कैसे जारी रहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
कमेटी की रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान, वित्तीय दस्तावेजों के परीक्षण तथा भुगतान की पूरी प्रक्रिया का ब्योरा शामिल किया जा रहा है। ट्रेजरी में बिल जमा होने से लेकर उनकी जांच, भुगतान की स्वीकृति और राशि बैंक खातों में भेजे जाने तक की प्रक्रिया की पड़ताल की गई है। किस स्तर पर किसकी क्या जिम्मेदारी थी और कहां लापरवाही हुई, इसे भी रिपोर्ट में दर्ज किया जा रहा है।
डीडीओ की भूमिका भी जांच के केंद्र में
इस घोटाले में केवल ट्रेजरी स्तर पर हुई गड़बड़ियों की पड़ताल नहीं की गई है। संबंधित विभागों में वेतन बिल तैयार करने और भुगतान की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांची गई है। पुलिस विभाग में डीडीओ की जिम्मेदारी डीएसपी स्तर के अधिकारियों को दी जाती है। ऐसे में वेतन बिलों के सत्यापन, कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड और भुगतान की अनुशंसा में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। जांच में डीडीओ स्तर पर भी लापरवाही और कथित संलिप्तता के पहलुओं को देखा गया है।
इसके अलावा ट्रेजरी ऑफिसर, प्रधान लेखापाल, लेखापाल और कंप्यूटर ऑपरेटरों की जिम्मेदारियों का भी आकलन किया गया है। जांच का एक अहम पहलू यह है कि फर्जी बिलों और संदिग्ध सेवा रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया किन-किन स्तरों से गुजरती रही। रिपोर्ट में संबंधित पदों पर तैनात अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका के आधार पर जवाबदेही तय करने की सिफारिश किए जाने की संभावना है।
अप्रैल में खुला था करोड़ों की निकासी का मामला
बोकारो ट्रेजरी घोटाले का मामला इस साल अप्रैल में पुलिस विभाग के वेतन मद से फर्जी निकासी के खुलासे के बाद सामने आया था। महालेखाकार कार्यालय की जांच में बोकारो और हजारीबाग के एसपी कार्यालयों में वेतन मद से संदिग्ध निकासी की जानकारी मिली थी। इसके बाद वित्त विभाग ने आठ अप्रैल को राज्य के सभी कोषागारों में बिलों और भुगतान की जांच के निर्देश जारी किए। विभाग ने भुगतान से पहले कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन पर जोर दिया था।
10 अप्रैल को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्यभर में संदिग्ध वेतन निकासी की जांच का निर्देश दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कमेटी गठित की। इसमें वित्त विभाग, महालेखाकार कार्यालय, अंकेक्षण निदेशालय और एनआईसी के अधिकारी शामिल किए गए।
दो जिलों में 42 करोड़ की अवैध निकासी
बोकारो और हजारीबाग जिला कोषागार से फर्जी वेतन निकासी के मामलों में अब तक करीब 42 करोड़ रुपये की अवैध निकासी सामने आई है। इसमें बोकारो से लगभग 11 करोड़ और हजारीबाग से करीब 31 करोड़ रुपये की निकासी शामिल है। शुरुआती जांच में आठ अप्रैल को जारी वित्त विभाग के पत्र में बोकारो से 3.15 करोड़ और हजारीबाग से 15.41 करोड़ रुपये की संदिग्ध निकासी का उल्लेख था। बाद की विस्तृत जांच में यह रकम काफी बढ़ गई।
जांच में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों की जन्मतिथि और सेवा रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर उनके नाम पर वेतन निकालने तथा रकम रिश्तेदारों और सहयोगियों के बैंक खातों में भेजने के तथ्य सामने आए। दोनों जिलों में सीआईडी ने भी अलग से आपराधिक जांच की है। बैंक खातों, फर्जी वेतन बिल और सेवा रिकॉर्ड में हेराफेरी के मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और आरोपपत्र दाखिल किए गए
रिपोर्ट के बाद तय होगी कार्रवाई की दिशा हैं।
उच्चस्तरीय कमेटी की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने के बाद सरकार उसके निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई करेगी। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी सामने आएगी, उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी की जा सकती है। कमेटी की प्रशासनिक और वित्तीय जांच के बाद हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले की जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। इस तरह बोकारो की रिपोर्ट न केवल एक जिले में हुई वित्तीय अनियमितताओं की तस्वीर स्पष्ट करेगी, बल्कि राज्य के अन्य कोषागारों में भी जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

