KANCHAN KUMAR
रांची : प्रकृति ने झारखंड को असीम खूबसूरती दी है। जंगल, नदी, पहाड़, झरने, खनिज संपदा के अलावा समृद्ध संस्कृति भी। इसे देश -दुनिया के सामने लाकर हम बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। यहां हर क्षेत्र में टूरिज्म की व्यापक संभावनाएं हैं। सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास भी कर रही है। राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ट्राइबल टूरिज्म को विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। जब बाहर के सैलानी (मेहमान) हमारे क्षेत्र में आएंगे तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, आय बढ़ेगी, घरों में समृद्धि आएगी और इसके साथ ही हमारी शान भी बढ़ेगी।

राज्य में 32 प्रकार की जनजातियां रहती हैं। उनके रहन-सहन, खानपान, भाषा संस्कृति में भी भिन्नता है। बाहर से आने वाले सैलानी उनके सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य को नजदीक से देखना, समझना एवं महसूस करना चाहेंगे। उनके लिए ट्राइबल टूरिज्म यादगार ट्रिप साबित हो सकता है।
अड़की से उलिहातू तक बनेगा पहला कॉरिडोर
इसे बढ़ावा देने के लिए अड़की से उलिहातू तक राज्य का पहला ट्राइबल टूरिज्म कॉरिडोर विकसित किया जा जाएगा। पर्यटन एवं कला संस्कृति मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ट्राइबल टूरिज्म विकसित करने के लिए विभाग के पदाधिकारियों को कार्य योजना बनाकर शीघ्र पहल करने का निर्देश दे चुके हैं।

मंत्री ने बताया था कि ट्राइबल टूरिज्म में आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन और खानपान से पर्यटकों को रूबरू कराया जाएगा। अड़की से उलिहातू के बीच ट्राइबल टूरिज्म कारिडोर विकसित होने से भगवान बिरसा मुंडा की जन्म स्थली को भी पर्यटक देख सकेंगे।
पहले राज्य में उग्रवादी एवं नक्सली गतिविधियों के कारण टूरिज्म की इस अवधारणा को धरातल पर ला पाना मुश्किल काम था। सैलानी की सुरक्षा एवं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के साधनों की कमी इसके विकास में चुनौतियां थीं। लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं है। आज बहुत जगहों पर सड़कें बन चुकी हैं। नक्सली गतिविधियां भी थम चुकी हैं। अड़की से उलिहातू तक सड़क बनाने की योजना पर काम भी आगे बढ़ चुका है।

उलिहातू ट्राइबल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र
उलिहातू की पहचान देश स्तर पर है। यह बिरसा मुंडा की जन्मस्थली है। बिरसा मुंडा के घर, उनके समाधि स्थल तथा उनके वंशज यहां मौजूद हैं। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति समेत कई केंद्रीय मंत्री यहां आ चुके हैं। यहां की मुंडारी संस्कृति, अखरा परंपरा और जनजातीय इतिहास को ग्रामीण पर्यटन के साथ जोड़ा जा रहा है।
ऐसे बढ़ेगी आय

पर्यटक गांवों में (होम स्टे) रहकर आदिवासी जीवन को समझने एवं जानने का प्रयास करेंगे। ग्रमीणों को किराया एवं उपयोग के अन्य सामान का पैसा मिलेगा। इससे उनकी आय बढ़ेगी। छऊ, संथाली, करमा जैसे लोकनृत्य व संगीत का आनंद लेंगे। कलाकारों को आय के साथ सम्मान भी बढ़ेगा। पारंपरिक व्यंजन धुस्का, हांड़ी, मड़ुआ आधारित भोजन का मजा लेंगे। साथ ही जंगल, पहाड़, झरने और ग्रामीण क्षेत्रों में जाने के लिए चारपहिया- दो पहिया वाहन एवं अन्य साधनों का उपयोग करेंगे।
झारखंड में ट्राइबल टूरिज्म के प्रमुख केंद्र
सारंडा (पश्चिम सिंहभूम), नेतरहाट और लातेहार क्षेत्र जहां बिरजिया, असुर जैसी विशेष जनजातियां निवास करती हैं। दुमका – संथाल परगना जहां के सोहराय और बाहा जैसे पर्व ख्यात हैं। ग्रामीण युवाओं को गाइड और होम-स्टे संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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