Jamshedpur (Jharkhand) : झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble of the Indian Constitution) से ‘धर्मनिरपेक्ष’ (Secular) और ‘समाजवादी’ (Socialist) जैसे महत्वपूर्ण शब्दों को हटाने की मांग का पुरजोर विरोध किया है। झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि ये शब्द संविधान की आत्मा हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर हटाया नहीं जाना चाहिए।
दोनो शब्द भारतीय संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न हिस्सा
शुक्रवार को साकची स्थित झामुमो कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कुणाल षाड़ंगी ने आरएसएस की इस मांग की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि आरएसएस का यह बयान दर्शाता है कि वे संविधान की इन बुनियादी अवधारणाओं को स्वीकार नहीं करते हैं। षाड़ंगी ने जोर देकर कहा कि ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्द भारतीय संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें हटाने का कोई भी प्रयास संविधान की मूल भावना के साथ खिलवाड़ होगा।
आरएसएस नेता के बयान पर आपत्ति
गौरतलब है कि गुरुवार को नई दिल्ली में एक समाचार पत्र समूह के एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस के सह कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना में बाद में जोड़े गए ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्दों का विरोध करते हुए इन्हें हटाने की मांग की थी। होसबाले के इस बयान के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। इसी क्रम में झामुमो ने भी खुलकर आरएसएस की इस मांग का विरोध किया है।
झामुमो प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि उनकी पार्टी हर स्तर पर संविधान की प्रस्तावना में निहित इन शब्दों को बनाए रखने के लिए संघर्ष करेगी। किसी भी ऐसे प्रयास को विफल करेगी, जो संविधान की मूल भावना को कमजोर करने का काम करेगा।

