जमशेदपुर : झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी मंगल कालिंदी के खिलाफ झूठा और जाली हलफनामा दायर करने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस मामले में भारतीय निर्वाचन आयोग और झारखंड राज्य चुनाव आयोग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच का आदेश दिया है। यह मामला भाजपा नेता अंकित आनंद की शिकायत के बाद प्रकाश में आया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि मंगल कालिंदी ने अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी दी है।
विवादित हलफनामा : उम्र को लेकर बड़ा सवाल
मंगल कालिंदी ने 2019 और 2024 के विधानसभा चुनाव में अपने हलफनामों में उम्र को अलग-अलग दर्शाया है। वर्ष 2019 के हलफनामे में उन्होंने अपनी उम्र 42 वर्ष बताई थी, जबकि 2024 के हलफनामे में यह 51 वर्ष बताई गई। सामान्यतः पांच सालों में उम्र में इतनी बढ़ोतरी संभव नहीं है, जिससे यह मामला संदेहास्पद हो गया है। इस विसंगति ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका को जन्म दिया है।
अंकित आनंद की मांग: नामांकन रद्द और एफआईआर दर्ज
भाजपा नेता अंकित आनंद ने इस मामले को गंभीर बताते हुए मांग की है कि मंगल कालिंदी का नामांकन रद्द किया जाए। उन्होंने यह आरोप लगाया है कि कालिंदी ने जानबूझकर निर्वाचन आयोग और जनता को गुमराह किया, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125 (क-ii) के अंतर्गत अपराध है। अंकित आनंद ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की है।
चुनाव आयोग की कार्रवाई: जांच के आदेश
अंकित आनंद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, जिसमें 2019 और 2024 के चुनावी हलफनामे और समाचार पत्र की कटिंग शामिल हैं, के आधार पर भारतीय निर्वाचन आयोग और झारखंड राज्य चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त अनन्य मित्तल ने जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के आरओ राहुलजी आनंद को जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो मंगल कालिंदी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। भाजपा ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए मांग की है कि चुनाव प्रक्रिया में ऐसी धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग की जांच का इंतजार
अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग की जांच पर टिकी हैं। अगर जांच में मंगल कालिंदी के खिलाफ आरोप साबित होते हैं, तो उनका नामांकन रद्द हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मामले में क्या नतीजे सामने आते हैं और क्या कदम उठाए जाते हैं।
Read Also- वक्फ बोर्ड की बैठक में TMC सांसद इस कदर भड़के कि टेबल पर ही फोड़ दी कांच की बोतल

