
पलामू : झारखंड के पलामू जिला अंतर्गत तरहसी प्रखंड के बेनका गांव में रविवार की सुबह मातम पसरा रहा। गांव के होनहार सपूत और एमजीएम मेडिकल कॉलेज-अस्पताल, जमशेदपुर के जूनियर डॉक्टर डॉ. सक्षम सिंह का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। अमानत नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पिता सत्येंद्र कुमार सिंह ने नम आंखों से अपने जवान बेटे को मुखाग्नि दी। यह हृदयविदारक दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
शनिवार की देर रात डॉ. सक्षम सिंह का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा था। शव के पहुंचते ही मां समेत परिवार के सभी सदस्य, रिश्तेदार और शुभचिंतक बिलख पड़े। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों ने पूरी रात अपने होनहार बेटे के पार्थिव शरीर के पास जागकर बिताई। रविवार सुबह अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी होने के बाद पार्थिव शरीर को अमानत नदी तट ले जाया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में गांव के लोग, रिश्तेदार और शुभचिंतक शामिल हुए।
अंतिम संस्कार के दौरान जवान बेटे को मुखाग्नि देते समय पिता सत्येंद्र कुमार सिंह की आंखों से आंसुओं का सैलाब फूट पड़ा। उनकी पीड़ा देखकर वहां मौजूद लोग भी खुद को नहीं रोक सके और पूरा माहौल गमगीन हो गया। गांव के लोगों ने कहा कि डॉ. सक्षम न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे गांव का गौरव थे। उनकी प्रतिभा, विनम्रता और सेवा भावना के कारण गांव के लोगों को उन पर गर्व था। उनके असामयिक निधन ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
उल्लेखनीय है कि जमशेदपुर स्थित डिमना लेक के पास तालाब में डूबने से डॉ. सक्षम सिंह की मौत हो गई थी। शनिवार को उसके शव का पोस्टमार्टम किया गया, जिसके बाद शाम करीब पांच बजे शव परिजनों को सौंप दिया गया। देर रात पार्थिव शरीर को बेनका गांव लाया गया।
डॉ. सक्षम की मौत हादसा नहीं, साजिश की आशंका, पिता ने हत्या का जताया शक
एमजीएम मेडिकल कॉलेज-अस्पताल, जमशेदपुर के जूनियर डॉक्टर डॉ. सक्षम सिंह की मौत को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मृतक के पिता सत्येंद्र कुमार सिंह और चचेरे भाई ओमप्रकाश सिंह ने इसे महज एक हादसा मानने से इनकार करते हुए गंभीर साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि डॉ. सक्षम की हत्या कर उनके शव को पानी में फेंका गया हो सकता है।
परिजनों के अनुसार, घटना से पूर्व डॉ. सक्षम सिंह, उनके साथी डॉ. समीर लाल और उनके साथ मौजूद जूनियर डॉक्टर डॉ. यश वरण के बीच किसी बात को लेकर विवाद और मारपीट हुई थी। इसमें महिला मित्र की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए कहा कि मारपीट के दौरान डॉ. सक्षम और डॉ. समीर की उंगलियों में चोटें आई थीं, जिसके बाद दोनों ने एमजीएम अस्पताल में अपना उपचार एवं ड्रेसिंग भी कराई थी। इसके बावजूद देर रात तीनों डिमना लेक पहुंचे, जहां संदिग्ध परिस्थितियों में डॉ. सक्षम सिंह और डॉ. समीर लाल की डूबने से मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद डॉ. यश वरण सुरक्षित बच गए।
मृतक के पिता सत्येंद्र कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को साजिश के तहत पानी में धकेला गया या उसकी हत्या कर पानी में फेंक दिया गया, जिससे उसकी मौत हुई। उन्होंने कहा कि मामले में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अब तक नहीं मिल पाया है। आखिर मारपीट की घटना के बाद तीनों डॉक्टर देर रात डिमना लेक क्यों पहुंचे? दो लोगों की मौत कैसे हो गई और तीसरा व्यक्ति सुरक्षित कैसे बच गया? इन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
वहीं, चचेरे भाई ओमप्रकाश सिंह ने भी पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जब तक घटना की सच्चाई सामने नहीं आती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक परिवार को न्याय नहीं मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि डॉ. सक्षम पूरे परिवार की उम्मीद थे और उनकी असामयिक मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
परिजनों ने जांच एजेंसियों से मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने तथा घटना से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह एक हादसा था या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी।
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