चाईबासा : कोल्हान छात्र संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात कर सीनेट बैठक में की गई एक विवादित टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। प्रतिनिधियों का आरोप है कि टाटा कॉलेज के निवर्तमान प्राचार्य डॉ. अमर सिंह ने बैठक के दौरान छात्र नेताओं के लिए “घूसखोर” और “क्रिमिनल” जैसे गंभीर व आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
छात्र नेताओं ने इसे न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बताया, बल्कि असंवैधानिक, अमर्यादित और मानहानिकारक भी करार दिया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का प्रतीक होता है। ऐसे में जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा बिना प्रमाण इस तरह के आरोप लगाना छात्र समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाने के साथ-साथ विश्वविद्यालय की साख को भी नुकसान पहुंचाता है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है, जिसमें छात्र नेता भी शामिल हैं। सार्वजनिक मंच से इस तरह के आरोप लगाना “प्राकृतिक न्याय” के सिद्धांतों के खिलाफ है और न्यायिक मूल्यों का उल्लंघन करता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे छात्र समुदाय के आत्मसम्मान से जुड़ा है। यदि इसे नजरअंदाज किया गया, तो इससे भविष्य में अविश्वास और अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
छात्रों की प्रमुख मांगें:
- मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
- दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई हो
- छात्र नेताओं की गरिमा और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए
- भविष्य में इस तरह की भाषा पर रोक के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों
अंत में छात्र नेताओं ने कुलपति से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वे चरणबद्ध असहयोग आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत कानूनी कार्रवाई का भी विकल्प खुला रखा है।
कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मामले में जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान पूर्व छात्र नेता कार्तिक महतो, पूर्व पीजी छात्र संघ अध्यक्ष सनातन पिंगुआ, पूर्व सचिव पिपुन बारीक और छात्र नेता अनुज पुरती समेत कई अन्य मौजूद थे।

