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Kolhan University : कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव : वरीयता दरकिनार, इन्हें मिली बड़ी जिम्मेदारी

Kolhan University : छात्र संगठनों में यह चर्चा भी है कि राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के अनुसार नियमित कुलसचिव के न रहने पर उप कुलसचिव और उप कुलसचिव के न रहने पर सहायक कुलसचिव को कुलसचिव का प्रभाव देना है

by Dr. Brajesh Mishra
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जमशेदपुर : चाईबासा स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 को लागू करने के बाद इसके प्रावधानों के आलोक में कार्य करना शुरू कर दिया है। यह राज्य का संभवतः पहला विश्वविद्यालय है जिसने अपने प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की पहल की है। कुलसचिव(प्रभारी) डॉ रंजीत कुमार कर्ण ने कुलपति प्रोफेसर अंजिला गुप्ता के आदेश पर 12 अलग-अलग निदेशकों की नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना जारी की। इसमें निदेशक अकादमिक मामले से लेकर निदेशक छात्र मामले, निदेशक संबद्ध कॉलेज, निदेशक अंगीभूत कॉलेज, निदेशक खेल, निदेशक आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ, निदेशक जन संपर्क, निदेशक सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। सभी नवनियुक्त निदेशकों की सूची इस प्रकार है-
डायरेक्टर – छात्र मामले : डॉ. संजय यादव
निदेशक – खेल एवं शारीरिक शिक्षा : डॉ. एम एन सिंह
निदेशक – इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट : डॉ. सुनीता कुमारी
निदेशक – एनएसएस : डॉ. मिनाक्षी मुंडा
निदेशक – आईक्यूएसी : डॉ. रंजीत कुमार कर्ण
निदेशक – इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी और डिजिटल लर्निंग : डॉ. शोभित रंजन
निदेशक – समावेशी शिक्षा : डॉ. धर्मेन्द्र रजक
निदेशक – इस्टेट एंड फैसिलिटी मैनेजमेंट : डॉ. अरविंद कुमार सिंह
निदेशक – संबद्ध महाविद्यालय : डॉ. प्रभात कुमार सिंह
निदेशक – अंगीभूत कॉलेज : डॉ. अरविंद कुमार सिंह
निदेशक – पब्लिक रिलेशन एंड कम्यूनिटी आउटरीच : डॉ. मिनाक्षी मुंडा
डीन – अकादमिक मामले : डॉ. संजय यादव

उम्मीद की जा रही है कि इन बदलावों से कोल्हान विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण प्रशासनिक और अकादमिक गतिविधियां संचालित हो सकेंगी। हालांकि अधिसूचना को देखकर के कई छात्र संगठनों में विरोध के स्वर भी सुनाई पड़े हैं। राजभवन ने स्पष्ट आदेश दिया है कि एक व्यक्ति को एक ही पद देना है, लेकिन यहां पर एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक पद दिए गए हैं। इसलिए छात्र संगठनों ने इस पर पुनर्विचार करने के लिए केयू की कुलपति को ज्ञापन देने का निर्णय लिया है। डॉ. रंजीत कुमार कर्ण खुद कुलसचिव के प्रभार में रहते हुए भौतिकी विभाग के अध्यक्ष और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक के रूप में भी कार्य करेंगे। इसी तरह डॉ. प्रभात कुमार सिंह वोकेशनल कोर्स के समन्वयक होने के साथ-साथ संबद्ध कॉलेज के निदेशक के रूप में भी कार्य करेंगे। डॉ. अरविंद कुमार सिंह परीक्षा विभाग के ओएसडी होने के साथ-साथ प्रभारी सीसीडीसी हैं, इतिहास विभाग के अध्यक्ष हैं और इनके अलावा दो अन्य निदेशक के पद भी उन्हें दिए गए हैं।

छात्र संगठनों में यह चर्चा भी है कि राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के अनुसार नियमित कुलसचिव के न रहने पर उप कुलसचिव और उप कुलसचिव के न रहने पर सहायक कुलसचिव को कुलसचिव का प्रभाव देना है। ऐसे में डॉ. रंजीत कुमार कर्ण इस पद पर कैसे बने हुए हैं ! जबकि उप कुलसचिव मुरारी कुमार मिश्र इस पद के कानूनी दावेदार हैं। इसी तरह परीक्षा नियंत्रक और वित्त पदाधिकारी भी अगर नियमित रूप से पदस्थापित नहीं हैं तो उनके स्थान पर उप परीक्षा नियंत्रक या सहायक परीक्षा नियंत्रक एवं उप वित्त अधिकारी या सहायक वित्त अधिकारी को कार्यभार देना है। लेकिन कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव द्वारा जारी अधिसूचना में इन तीन महत्वपूर्ण पदों पर नई नीति के अनुसार पदस्थापन की कोई व्यवस्था नहीं है।

निदेशकों की नियुक्ति में वरीयता नज़रअंदाज़

कोल्हान विश्वविद्यालय द्वारा निदेशकों की नियुक्ति से संबंधित जारी अधिसूचना में वरीयता को नजरअंदाज किया गया है। कई शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर भी हैं, लेकिन किसी भी महत्वपूर्ण पद पर उनकी नियुक्ति विश्वविद्यालय द्वारा नहीं की जा रही है। डॉ. तपन कुमार खाड़ा, डॉ. एस सी दाश, डॉ. अशोक कुमार झा, डॉ. रविंद्र कुमार चौधरी, डॉ. सरोज कुमार कैबर्त, डॉ. विजय कुमार पीयूष, डॉ. बी. बी. भुईयां, डॉ. पी. के गुप्ता, डॉ. नीता सिन्हा जैसे कई वरीय एसोसिएट प्रोफेसर लगातार उपेक्षित किये जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वीसी अंजिला गुप्ता ने जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में भी इसी तरह का काम किया। वहां अभी तक जितने भी रजिस्ट्रार बनाए गए, सभी असिस्टेंट प्रोफेसर ही थे, जबकि वहां पहले से एसोसिएट प्रोफेसर कार्य कर रहे थे।

सीनेट और सिंडिकेट का भी करना होगा पुनर्गठन

नई नीति में सीनेट और सिंडिकेट का भी नए सिरे गठन किए जाने का प्रावधान है। कोल्हान विश्वविद्यालय इस संबंध में कब निर्णय लेता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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