चाईबासा : बच्चों व किशोरों से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता बरते जाने की जरूरत है। इसके लिए विशेष किशोर पुलिस इकाइयों को अधिक से अधिक सशक्त बनाने की जरूरत है। पश्चिमी सिंहभूम जिला पुलिस लाइन स्थित कांफ्रेंस हॉल में बुधवार को बाल-संवेदनशील पुलिसिंग मामले का दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाएं विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला में उक्त बातें उभरकर सामने आईं।
कार्यशाला में 39 बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO) हुए शामिल
कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष किशोर पुलिस इकाइयों (SJPU) को सशक्त बनाकर बाल संरक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाना था। इसमें रांची जिले के विभिन्न थानों से आए 39 बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO) शामिल हुए। आयोजन पश्चिम सिंहभूम पुलिस विभाग की ओर से यूनिसेफ के सहयोग और सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (CCR), नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची के तकनीकी सहयोग से किया गया।
JJ और POCSO अधिनियम पर हुई चर्चा
पश्चिम सिंहभूम पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों को किशोर न्याय अधिनियम और POCSO अधिनियम के तहत उचित मामले के दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाओं के महत्व पर विस्तार से बताया। उन्होंने इन मामलों के संचालन में संवेदनशीलता बरतने और निर्धारित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पुलिस लाइन के मेजर मंसूर गोप ने बताया कि यूनिसेफ और CCR, NUSRL के सहयोग से सभी बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों के लिए सात चरणों में सशक्तिकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बुधवार को इसका पांचवां चरण संपन्न हुआ।
तकनीकी सत्रों में दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यक्रम की शुरुआत अनिरुद्ध सरकार, CCR, NUSRL के स्वागत भाषण और प्रशिक्षण-पूर्व मूल्यांकन प्रश्नावली से हुई। तकनीकी सत्रों में यूनिसेफ के बाल संरक्षण अधिकारी गौरव कुमार ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 और झारखंड किशोर न्याय नियम 2017 में निहित बाल-संवेदनशील पुलिसिंग के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने गरिमा, भेदभाव-रहित दृष्टिकोण, गोपनीयता और बाल-हित सर्वोपरि रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
बाल भिक्षावृत्ति व तस्करी पर भी दी गई जानकारी
सत्र में बाल भिक्षावृत्ति, मादक पदार्थों की तस्करी जैसे अपराधों की पहचान और संवेदनशील कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी जानकारी दी गई। CWPO की भूमिका, बाल अनुकूल प्रक्रियाएं, थानों में बाल-मित्र वातावरण, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई और प्रोबेशन अधिकारी के साथ समन्वय, अभिलेख एवं रिपोर्टिंग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिभागियों को भूमिका-निर्वाह, केस स्टडी और उत्तेजनात्मक अभ्यासों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। बाल विवाह, लैंगिक शोषण और विधि से संघर्षरत बच्चों (CCL) से जुड़े मामलों पर केस स्टडी आधारित अभ्यास कराया गया, जिसका संचालन गौरव कुमार ने किया।

