चाईबासा : झारखंड में पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल के कोलबोंगा क्षेत्र में आईईडी ब्लास्ट से घायल हुए हाथी की गुरुवार को देर शाम मौत हो गई। पिछले आठ दिनों से वन विभाग और पशु चिकित्सकों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा था, लेकिन गंभीर घाव और संक्रमण के कारण हाथी को बचाया नहीं जा सका।
जानकारी के अनुसार, कोलबोंगा जंगल में 4 मई 2026 को आईईडी विस्फोट से एक हाथी गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। विस्फोट में उसका एक पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक मौके पर पहुंचे और उसी दिन से हाथी का उपचार शुरू कर दिया गया।
गुरुवार शाम को हाथी ने अंतिम सांस ली। हाथी की मौत की पुष्टि करते हुए पशु चिकित्सक डॉ. संजय घोलतकर ने बताया कि विस्फोट से उसके पैर में गहरा घाव हो गया था, जो धीरे-धीरे गंभीर संक्रमण में बदल गया। उन्होंने कहा कि सूचना मिलने के बाद से लगातार हाथी को आवश्यक दवाएं और प्राथमिक उपचार दिया जा रहा था, लेकिन चोट की गंभीरता अधिक होने के कारण टीम उसे बचा नहीं सकी। डॉ. घोलतकर ने कहा कि इलाज के दौरान हाथी को दर्द से राहत देने और संक्रमण रोकने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन घाव गहरा होने और लगातार कमजोरी के चलते उसकी स्थिति बिगड़ती गई। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को हाथी का पोस्टमार्टम किया जाएगा, ताकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सके।
कोलबोंगा क्षेत्र सारंडा का संवेदनशील हिस्सा माना जाता है, जहां पहले भी आईईडी विस्फोट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय ग्रामीणों ने घटना पर दुख जताते हुए जंगल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है। वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है।
आईईडी ब्लास्ट से 5 हाथियों की हो चुकी मौत
झारखंड के सारंडा वन क्षेत्र (पश्चिमी सिंहभूम) में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए IED (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की चपेट में आने से अब तक 5 हाथियों की मौत हुई है। जानकारी के अनुसार 14 मई 2026 तक सारंडा में आईईडी विस्फोट से कुल 5 हाथियों की मौत हो चुकी है, जिसमें 14 मई 2026 को घायल दंतैल हाथी की मौत शामिल है। इसी तरह आईईडी विस्फोट में पहले हाथी की मौत 5 जुलाई 2025, दूसरे हाथी की मौत 10 जुलाई 2025 को इलाज के दौरान हो गई थी। वहीं 27 जुलाई 2026 को दंतेल हाथी का अवशेष मिला, जबकि 12 अक्टूबर 2026 को एक गर्भवती हथिनी की मौत इलाज के क्रम में हो गई थी।
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