एंटरटेनमेंट डेस्क, जमशेदपुर : भारतीय सिनेमा में सत्यजीत राय जैसे दिग्गज फिल्मकारों की श्रेणी में जिनका नाम लिया जाता है उनमें से एक हैं गौतम घोष। सार्थक सिनेमा और एक से बढ़कर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए दुनिया में ख्याति प्राप्त करनेवाले इस फिल्मकार को लाइव देखना और उनकी बातों को सुनना भी गर्वानुभूति देता है। यह सौभाग्य मिला जमशेदपुर करीम सिटी के छात्र-छात्राओं और इस शहर के साहित्यकारों-कलाकारों को।
मौका था ‘सृजन संवाद’ की 128 संगोष्ठी का। 26 अगस्त 2023 को इसका आयोजन स्ट्रीमयार्ड तथा फ़ेसबुक लाइव पर किया गया। इसमें प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक गौतम घोष आमंत्रित थे। उन्होंने ‘कलेक्टिव मेमोरीज ऑफ़ टाइम’ पर अपनी बात रखी। उनकी फिल्मों की तरह अर्थपूर्ण बातों व सफर के साथ लोग इस कदर जुड़े रहे कि पता ही नहीं चला कब और कितन समय बीत गया।
साझा किए दलाई लामा, बिस्मिल्लाह खान पर बनाई गई फिल्मों के अनुभव
गौतम घोष ने अपने वक्तव्य में कहा कि वे फ़िल्मों के विभिन्न दौर से जुड़े रहे हैं, उन्होंने श्वेत-श्याम, रंगीन दोनों तरह की फ़िल्में बनाई हैं और जब तकनीकी खूब विकसित हो गई है तो उन्होंने नए कैमरों का प्रयोग किया है। उन्होंने शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान, दलाई लामा पर फ़िल्म बनाते समय अपने अनुभवों को साझा किया। उनके अनुसार ये महान लोग अत्यंत सरल और नम्र स्वभाव के हैं, जिनसे उन्होंने बहुत कुछ सीखा है।
बांग्लादेश से रहा है संबंध, झारखंड में कर रहे नई फिल्म की शूटिंग
गौतम घोष ने देश विभाजन से होने वाली त्रासदी को देखा है, उनका संबंध पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) से रहा है, वे आज भी फ़िल्मांकन केलिए बांग्लादेश जाते हैं। बांग्लादेश के कलाकार उनकी फ़िल्मों में काम करते हैं। गौतम घोष अपनी नवीनतम फ़िल्म ‘राहगीर’ की शूटिंग के सिलसिले में काफी दिन झारखंड में थे, उन्हें यह प्रदेश बहुत पसंद है, उन्होंने यहां के अभिनेताओं से अपनी फ़िल्म में काम करवाया है। वे कई बार जमशेदपुर भी आए हैं। इन्हीं दौरों के समय वे डॉ. विजय शर्मा से मिले हैं। उनके अनुसार देश और राज्य की सरकारों को नए फ़िल्म बनाने वालों को प्रोत्साहन देना चाहिए।
थिएटर में जाकर ही देखनी चाहिए फिल्म
गौतम घोष ने कहा कि आज भी सेल्युलाइड पर फ़िल्म बनाना उन्हें अच्छा लगता है। साथ ही कहा कि वे ऐसा मानते हैं कि फ़िल्म थियेटर में जाकर बड़े परदे पर ही देखनी चाहिए। फ़िल्म का असली आनंद समूह के साथ देखने में ही है। गौतम घोष ने ‘सृजन संवाद’ की प्रशंसा करते हुए शुभकामनाएं एवं धन्यवाद दिया। उन्होंने भविष्य में पुन: ‘सृजन संवाद’ में आने की इच्छा जाहिर की। हम उन्हें बार-बार बुलाना चाहेंगे।
1973 से शुरू हुआ डॉक्यूमेंट्री तथा फ़िल्म का सफर अभी जारी
थियेटर तथा फ़िल्म आंदोलन से जुड़े गौतम घोष ने 1973 से डॉक्युमेंट्री तथा फ़िल्म बनानी शुरु की। उन्हें प्रारंभ से पुरस्कार मिले हैं और अब तक वे 18 राष्ट्रीय तथा कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने ‘न्यू अर्थ’, ‘हंग्री ऑटम’, ‘माँ भूमि’, ‘दखल’, ‘पार’, ‘अंतरजली यात्रा’, ‘पद्मा नदीर माझी’, ‘पतंग’, ‘गुड़िया’, ‘देखा’, ‘अबार अरण्य’ ‘यात्रा’, ‘कालबेला’, ‘मोनेर मानुष’, ‘शंखचील’, ‘राहगीर’, ‘लैंड ऑफ़ सैंड डून्स’, राय’ आदि फ़िल्में तथा डॉक्यूमेंट्री बनाई हैं। वे एकमात्र ऐसे भारतीय हैं, जिन्हें इटली का डि सिका सम्मान प्राप्त हुआ है। वे कई ज्यूरी में भी रह चुके हैं।
जीवन एवं कार्यों पर लिखी जा रही पुस्तक
कार्यक्रम में ‘सृजन संवाद’ की संयोजिका डॉ. विजय शर्मा ने सबका स्वागत करते हुए बताया कि वे गौतम घोष से कई बार मिली हैं। तकरीबन उनकी सब फ़िल्में देखी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे उनके जीवन एवं कार्यों पर एक पुस्तक लिख रही हैं, जिसे गौतम घोष के पचहत्तरवें जन्मदिन पर लाने का प्रयास है। कार्यक्रम का संचालन करीम सिटी कॉलेज की मासकॉम विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा तिवारी ने किया। न्यू डेल्ही फ़िल्म फ़ाउंडेशन के संस्थापक आशीष कुमार ने निर्देशक, फ़ोटोग्राफ़र, अभिनेता गौतम घोष का विस्तृत परिचय दिया। करीब डेढ़ घंटे चले इस प्रोग्राम में संचालक डॉ. नेहा तिवारी, आशीष कुमार सिंह तथा फ़ेसबुक लाइव से जुड़े दर्शक/श्रोता के प्रश्नों का उत्तर उन्होंने बहुत धैर्य के साथ दिया।
फ़ेसबुक लाइव के माध्यम से जुड़े लोग
देहरादून से सिने-इतिहासकार-समीक्षक मनमोहन चड्ढ़ा, गोरखपुर से अनुराग रंजन, मुम्बई से तेजस पुनिया, पटना से कवि निखिल आनंद गिरि, जमशेदपुर से ऋचा द्विवेदी, कवि आभा विश्वकर्मा, विभा झा, राँची से कहानीकार पंकज मित्र, गोमिया से लेखक डॉ. प्रमोद कुमार बर्णवाल, दिल्ली से कहानीकार ओमा शर्मा, रक्षा गीता, हरिनाथ कुमार तथा करीम सिटी कॉलेज, मास कम्युनिकेशन के विद्यार्थी फ़ेसबुक लाइव के माध्यम से उपस्थित थे, इनकी टिप्पणियों से कार्यक्रम और समृद्ध हुआ। डॉ. विजय शर्मा ने अगले महीने ‘सृजन संवाद’ में साहित्य अकादमी पुरस्कृत उपन्यासकार अलका सरावगी के आने की घोषणा कर कार्यक्रम की समाप्ति की।
13 वर्ष से हर माह होता है सृजन संवाद का आयोजन
‘सृजन संवाद’ पिछले 13 वर्षों से हर माह साहित्य, सिनेमा एवं विभिन्न कलाओं पर चर्चा करता आ रहा है। विषय विशेष के विद्वानों ने इसके मंच पर अपनी बातें रखी हैं। कार्यक्रम को न्यू डेल्ही फ़िल्म फ़ाउंडेशन के संस्थापक आशीष कुमार सिंह, करीम सिटी कॉलेज की मासकॉम विभाग प्रमुख डॉ. नेहा तिवारी, डॉ. विजय शर्मा ने अपने प्रश्नों तथा टिप्पणियों से सजीव बनाए रखा। कहानीकार गीता दूबे ने घौतम घोष के वक्तव्य की प्रशंसा करते हुए, धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का तकनीकि सहयोग ‘यायावरी वाया भोजपुरी’ के अनुराग रंजन का रहा।

