
रांची : झारखंड की राजधानी रांची स्थित नामकुम अंचल कार्यालय से जुड़े एक पुराने सरकारी दस्तावेज के गायब होने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। दफ्तर से म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की जरूरी फाइलें गायब करने के आरोप में एसीबी ने तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार दीक्षित और पूर्व क्लर्क दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
इस पूरे फर्जीवाड़े और लापरवाही के तार केवल कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं हैं। मामले की प्राथमिक जांच के बाद दर्ज की गई एफआईआर में नामकुम की तत्कालीन अंचल अधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा को भी मुख्य आरोपियों में नामजद किया गया है।
अंचल कार्यालय से झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा मामला
यह पूरा विवाद साल 2013-14 के एक दाखिल-खारिज केस (वाद संख्या 356R-27/2013-14) से जुड़ा है। आरोप है कि अंचल कार्यालय के भीतर से ही इस केस से संबंधित महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड और फाइलें रहस्यमयी तरीके से गायब कर दी गईं। जब पीड़ित पक्ष को अंचल कार्यालय से न्याय नहीं मिला, तो मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा।
अदालत में सुनवाई के दौरान दस्तावेजों के गायब होने की बात सामने आई। हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत के स्पष्ट आदेश के बाद एसीबी ने हरकत में आते हुए 26 अगस्त को भ्रष्टाचार का मामला (कांड संख्या 18/2026) दर्ज कर छानबीन शुरू की।
एसीबी की पड़ताल और गिरफ्तारी
मामले की गहराई से जांच करते हुए एसीबी की टीम ने उस दौर में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली व भूमिका को खंगाला। सबूत मिलने के बाद 22 सितंबर को कार्रवाई करते हुए टीम ने 65 वर्षीय पूर्व सीआई मनोज कुमार दीक्षित और 51 वर्षीय पूर्व लिपिक दीपक कुमार को हिरासत में ले लिया।
फिलहाल एसीबी की टीम दोनों आरोपियों से पूछताछ कर पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि आखिर सरकारी दफ्तर से फाइलें किस मंशा से और किसके इशारे पर गायब कराई गई थीं। इस मामले में पूर्व सीओ की भूमिका को लेकर भी शिकंजा कसता जा रहा है।

