
रांची : नामकुम-डोरंडा फोरलेन परियोजना की लागत 13 वर्षों में 132.44 करोड़ रुपये बढ़ गई है। पथ निर्माण विभाग ने परियोजना के लिए 162.82 करोड़ रुपये की द्वितीय पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। वर्ष 2013 में इस परियोजना को 30.37 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी मिली थी, जबकि जनवरी 2024 में इसे बढ़ाकर 126.34 करोड़ रुपये किया गया था। अब जून 2026 में लागत बढ़ाकर 162.82 करोड़ रुपये कर दी गई है।
दरअसल, 6.70 किलोमीटर लंबी नामकुम-डोरंडा फोरलेन सड़क का निर्माण वर्ष 2014 में ही पूरा हो गया था, लेकिन सड़क चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा सभी रैयतों को नहीं मिल पाया था। प्रभावित रैयत लंबे समय से भुगतान की मांग कर रहे थे और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब लंबित मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया तेज की गई है।
इसी कारण परियोजना की लागत में फिर बढ़ोतरी की गई है। नई स्वीकृति में भू-अर्जन की बकाया मुआवजा राशि भी शामिल की गई है। पथ निर्माण विभाग ने मुआवजा भुगतान के लिए राशि जिला भू-अर्जन कार्यालय, रांची को उपलब्ध करा दी है। वर्तमान में बड़ा घाघरा और खेजरीवाल मौजा के रैयतों को मुआवजे का भुगतान किया जा रहा है। करीब 12 साल बाद प्रभावित रैयतों को उनकी जमीन का मुआवजा मिलना शुरू हुआ है।
विभागीय आदेश के अनुसार, परियोजना पर वर्ष 2025-26 तक 115.84 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि शेष 46.99 करोड़ रुपये वर्ष 2026-27 में खर्च किए जाएंगे। मुख्य अभियंता को परियोजना की मासिक समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। सरकार का कहना है कि संशोधित प्राक्कलन के अनुरूप शेष वित्तीय दायित्वों, विशेषकर भू-अर्जन मुआवजे का भुगतान पूरा किया जाएगा।

