
रांची : झारखंड हाई कोर्ट ने 7वीं JPSC परीक्षा में दिव्यांगों के लिए आरक्षित खाली पदों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने जेपीएससी (JPSC) को आदेश दिया है कि वह 12 हफ्तों के भीतर याचिकाकर्ता सदानंद कुमार को नौकरी देने की सिफारिश करे। यह फैसला जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सुनाया।
7वीं जेपीएससी परीक्षा में कुल 252 पदों में से 7 पद दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए रिजर्व (आरक्षित) रखे गए थे। नियम के मुताबिक इन पदों पर दिव्यांगों की ही भर्ती होनी थी। लेकिन जेपीएससी ने इंटरव्यू के लिए सिर्फ 4 दिव्यांग उम्मीदवारों को बुलाया। उनमें से भी केवल 3 का ही सिलेक्शन किया। बाकी बचे हुए 4 पदों को जेपीएससी ने सामान्य या दूसरी कैटेगरी के उम्मीदवारों से भर दिया।
इसके खिलाफ सदानंद कुमार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। सदानंद के वकील अमृतांश वत्स ने कोर्ट में दलील दी कि जेपीएससी का यह कदम कानून के खिलाफ है।
कोर्ट में दी गई दलीलें
वकील ने ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016’ का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि अगर दिव्यांगों की किसी एक खास कैटेगरी (जैसे देखने या सुनने में असमर्थ) में उम्मीदवार नहीं मिलते हैं, तो उन पदों को दिव्यांगों की ही दूसरी कैटेगरी के उम्मीदवारों से भरा जाना चाहिए (इसे पदों का इंटरचेंज कहते हैं)।
अगर फिर भी पद खाली रह जाए, तो उन्हें अगली वैकेंसी के लिए बचाकर रखना चाहिए, न कि किसी अन्य वर्ग को देना चाहिए।
अदालत का फैसला
याचिकाकर्ता सदानंद कुमार को परीक्षा में 580 नंबर मिले थे, जो कि चुने गए एक अन्य दिव्यांग उम्मीदवार के बराबर ही थे। खुद जेपीएससी ने भी माना कि दिव्यांगों के चार पद खाली रह गए थे।
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि दिव्यांगों की अलग-अलग श्रेणियों के बीच पदों को आपस में बदलकर (इंटरचेंज करके) सदानंद के केस पर विचार किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने सदानंद के पक्ष में फैसला देते हुए जेपीएससी को जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
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