हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली : 29 अक्टूबर को विश्व सोरायसिस दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है। झारखंड के जाने-माने चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. कुमार ने बताया कि भारत में सोरायसिस के 0.44 से 2.8 प्रतिशत के बीच मरीज हैं।
ठंड में बढ़ जाता सोरायसिस
दरअसल, सोरायसिस त्वचा की एक बीमारी है, जिसमें लाल रंग के पपड़ीदार चकत्ते त्वचा पर बनने लगते हैं। यह रोग ज्यादातर जवान या बड़े उम्र के लोगों में पाया जाता है। पर कभी कभार बचपन में भी यह समस्या देखने को मिलती है। महिलाएं और पुरुष समान रूप से प्रभावित होते हैं।
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छुआछूत की बीमारी नहीं है सोरायसिस
डॉ. आर. कुमार कहते हैं कि त्वचा पर होने वाली यह समस्या पीड़ित व्यक्ति के पूरे जीवन को प्रभावित करने लगती है। यह रोग छूने या हाथ मिलाने से नहीं फैलता, इसके बावजूद पीड़ित को कई तरह के स्टिग्मा का सामना करना पड़ता है। यह किसी व्यक्ति के भावनात्मक, मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों को भी प्रभावित करने लगता है। जबकि कुछ लोग समय के साथ इसके प्रति इतने सहज हो जाते हैं कि उपचार को भी बीच में ही छोड़ देते हैं। सोरायसिस के संदर्भ में यह एक और समस्या है।—————
सोरायसिस के क्या कारण हैं?
डॉ. आर. कुमार कहते हैं कि सोरायसिस के कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह सुनिश्चित है कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली और आनुवांशिक कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉक्टर और वैज्ञानिक अब तक सोरायसिस के असल कारण तक नहीं पहुंच पाए हैं। फिर भी कुछ सामान्य कारण हैं जो सोरायसिस के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। अक्सर कहा जाता है कि यदि आपके परिवार में किसी को सोरायसिस की बीमारी है, तो आपको सोरायसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। पर वास्तव में इसके बिना भी किसी की त्वचा पर सोरायसिस विकसित हो सकता है।
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सामान्य सोरायसिस ट्रिगर कारक इस प्रकार हैं
– तनाव : मानसिक तनाव सबसे आम सोरायसिस ट्रिगर्स में से एक है। साथ ही, एक सोरायसिस फ्लेयर तनाव पैदा कर सकता है। विश्राम यानी रिलैक्सिंग तकनीक और तनाव प्रबंधन तनाव को सोरायसिस को प्रभावित करने से रोकने में मदद कर सकता है।
– त्वचा पर चोट लगना : सोरायसिस त्वचा के उन क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है जो घायल या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। खरोंच, सनबर्न, कीड़ो के काटने और टीकाकरण सभी सोरायसिस को बढ़ा सकते हैं।
– इंफेक्शन : कोई भी इंफेक्शन सोरायसिस बढ़ा सकता है। आप कान के इंफेक्शन, ब्रोंकाइटिस, टॉन्सिलिटिस या श्वसन संक्रमण के बाद सोरायसिस भड़कने का अनुभव कर सकते हैं।
– मौसम : ठंडा मौसम अक्सर सोरायसिस को बढ़ा सकता है। प्राकृतिक धूप और उच्च आर्द्रता के कारण गर्म मौसम अक्सर सोरायसिस में सुधार कर सकता है।
– स्मोकिंग : स्मोकिंग एक बहुत आम ट्रिगर है सोरायसिस का। सोरायसिस के मरीजों को हम अक्सर सलाह देते हैं की स्मोकिंग को छोड़ दें।
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सोरायसिस का इलाज कैसे किया जाता है?
– स्टेरॉयड क्रीम।
– शुष्क त्वचा के लिए मॉइस्चराइजर।
– त्वचा कोशिका उत्पादन (एंथ्रेलिन) को धीमा करने के लिए दवा।
– औषधीय लोशन या शैंपू।
– विटामिन डी3 मरहम।
– विटामिन ए या रेटिनोइड क्रीम।
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क्या सोरायसिस हमेशा के लिए ठीक हो सकता है?
आपके मन में सवाल आता होगा कि क्या यह बीमारी हमेशा के लिए ठीक हो सकता है। इसका जवाब देते हुए चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. कुमार कहते हैं कि सोरायसिस त्वचा की एक ऑटोइम्यून बीमारी है, इसलिए इसका कोई इलाज अभी तक ज्ञात नहीं है। इस सूजन वाली त्वचा की स्थिति का एकमात्र उपचार संभव है जो लक्षणों को नियंत्रित और प्रबंधित करता है और फ्लेयर-अप को रोकता है। यह एक पुरानी और आजीवन स्थिति है।
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सोरायसिस के लक्षण क्या है
– लाल पपड़ीदार, सफेद धब्बे।
– छोटे स्केलिंग स्पॉट ज्यादातर बच्चों में होते हैं।
– सूखी, फटी त्वचा।
– जलन, खुजली या दर्द होना।
– चितकबरे या फटे नाखून
– जोड़ों का दर्द।
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