
चाईबासा : गुजरात के राजकोट से झारखंड के लिए एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। कोल्हान क्षेत्र के 4 प्रवासी मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले एक वर्ष से एक निजी कंपनी में बिना वेतन के काम कराया जा रहा था। मजदूरों का कहना है कि जब भी उन्होंने अपनी मजदूरी मांगी, उनके साथ मारपीट की गई और बंधुआ मजदूरों की तरह जबरन काम कराया गया।
पीड़ित मजदूरों में चक्रधरपुर के कार्तिक लोहार, गोइलकेरा के राधे लोहार, हाटगम्हरिया के लक्ष्मण पुरती और गोविंदा पुरती शामिल हैं। इन मजदूरों का आरोप है कि कंपनी ने उन्हें बंधक बनाकर रखा था और बाहर निकलने की भी अनुमति नहीं दी जाती थी। इनमें एक महिला मजदूर भी शामिल है। मजदूरों ने किसी तरह कंपनी से भाग कर बुधवार रात राजकोट रेलवे स्टेशन पहुंचने में सफलता हासिल की। फिलहाल वे स्टेशन परिसर में ही फंसे हुए हैं। उनके पास न खाने के लिए पैसे हैं और न ही झारखंड लौटने के लिए ट्रेन का टिकट खरीदने की क्षमता। आर्थिक तंगी और असुरक्षा के बीच वे बेहद दयनीय स्थिति में मदद का इंतजार कर रहे हैं।
पीड़ितों ने झारखंड सरकार, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से भावुक अपील करते हुए कहा है कि उन्हें सुरक्षित राजकोट से निकालकर उनके घर पहुंचाया जाए। मजदूरों का कहना है कि वे भय के साये में जी रहे हैं और अपनी जान का खतरा महसूस कर रहे हैं।मजदूरों ने यह भी दावा किया है कि उनके कई अन्य मजदुर साथी अब भी उसी कंपनी में फंसे हुए हैं। आरोप है कि उनसे भी जबरन काम कराया जा रहा है, विरोध करने पर मारपीट की जाती है और उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया जाता। यदि मजदूरों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला बंधुआ मजदूरी, अवैध बंधक बनाकर रखने, मजदूरों का शोषण और श्रम कानूनों के गंभीर उल्लंघन का हो सकता है। ऐसे में झारखंड सरकार के श्रम विभाग, पुलिस प्रशासन और झारखंड सरकार के लिए यह गंभीर विषय बन गया है। पीड़ित मजदूरों ने तत्काल हस्तक्षेप कर सुरक्षित घर वापसी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

