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RANCHI SARAS MELA: तसर सिल्क डिजिटल प्रिंट वाली साड़ियों का कलेक्शन, सोहराय साड़ी की कीमत जानकर चौंक जाएंगे आप

मोरहाबादी में 20 मार्च तक सरस मेला का किया गया है आयोजन

by Vivek Sharma
RANCHI: रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित सरस मेला 2026 में तसर सिल्क साड़ियां, सोहराय साड़ी, रागी कैंडी और 650 स्टॉल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
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RANCHI : रांची के मोरहाबादी मैदान में चल रहे राजकीय हथकरघा एवं सरस मेला लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह मेला 20 मार्च तक चलेगा, जहां देशभर के कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के प्रोडक्ट्स की प्रदर्शनी लगाई गई है। मेले में झारखंड की कला और शिल्प के साथ-साथ आधुनिक डिजाइन भी देखने को मिल रहा है। खासकर तसर सिल्क डिजिटल प्रिंट वाली साड़ियों का कलेक्शन लोगों को खूब पसंद आ रहा है। इन साड़ियों की खूबसूरती और कीमतें ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं।

झारक्राफ्ट में झारखंड की पारंपरिक सोहराय साड़ियों का भी शानदार कलेक्शन उपलब्ध है। जिसकी कीमत 7 हजार से लेकर 12 हजार रुपए तक है। वहीं कॉटन साड़ियों का कलेक्शन 1200 से लेकर 2 हजार रुपए के बीच का है। वहीं बेडशीट भी 1622 रुपए में अवेलेवल है। इसके अलावा पलाश मार्ट में पोषक तत्वों वाली रागी की कैंडी भी लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो रही है। वहां पर बनाना और आरेंज फ्लेवर की रागी कैंडी है। इसके अलावा अचार, पाउडर और गोड़ा चावल भी मेला में उपलब्ध है। जो शुगर कंट्रोल करने में सहायक माना जाता है।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने भी की पेंटिंग

झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक ने भी पेंटिंग में हाथ आजमाया। इससे पहले उनका स्वागत झारक्राफ्ट की प्रबंध निदेशक गरिमा सिंह ने किया। मेले में लगाए गए लाइव डेमोंस्ट्रेशन सेक्शन का अवलोकन किया। उन्होंने देखा कि किस प्रकार रेशम के कोकून से धागा तैयार किया जाता है और फिर रीलिंग के बाद बुनाई की प्रक्रिया को देखा। कारीगरों द्वारा किए जा रहे इस पारंपरिक कौशल को देखकर वे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने कारीगरों से बातचीत कर उनके काम की सराहना की और उन्हें अपने पारंपरिक हस्तशिल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। बता दें कि मेले में झारक्राफ्ट की ओर से पेंटिंग सीखने का स्टॉल भी लगाया गया है। जहां पर 200 रुपए देकर कोई भी पेंटिंग सीख सकता है। एक घंटे के ट्रेनिंग सेशन में पेंटिंग सिखाने के बाद पेंटिंग को साथ लेकर जा सकते है। वहीं ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट भी दिया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने किया झारक्राफ्ट को सहयोग

इस आयोजन में झारक्राफ्ट के साथ-साथ वीवर्स सर्विस सेंटर, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रोमोशन सोसायटी, हथकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय और मुख्यमंत्री लघु व कुटीर उद्योग विकास बोर्ड सहित कई संस्थाओं ने भागीदारी की है। केंद्र सरकार का भी इसमें सहयोग है जिससे कि देशभर के कारीगरों को एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जा सके।

खादी के हर्बल और बांस के प्रोडक्ट

मेले में साड़ियों के अलावा डिजाइनर कुर्ती, सलवार सूट, स्कार्फ, दुपट्टा, शर्ट, कुर्ता, बंडी, शॉल, उच्च गुणवत्ता वाले रेशम के कपड़े, लेदर बैग, खादी के हर्बल उत्पाद, बांस के प्रोडक्ट, लाह की चूड़ियां और ट्राइफेड के डिजाइनर आइटम्स भी उपलब्ध हैं। इन प्रोडक्ट्स को देखने और खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। राज्य के बुनकरों को अधिक से अधिक काम और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की भी तैयारी सरकार ने कर ली है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से कारीगरों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

650 स्टॉल लगाए गए है मेले में

मोरहाबादी मैदान में आयोजित इस भव्य मेले में लगभग 650 स्टॉल लगाए गए हैं। जिन्हें विकास आयुक्त (हथकरघा), वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार, ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार और झारक्राफ्ट द्वारा संयुक्त रूप से लगाया गया है। इनमें देशभर के बुनकरों के हैंडलूम वस्त्र और टेक्सटाइल उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। जेएसएलपीएस के अंतर्गत 100 स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। जहां ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हैंडलूम, हैंडक्राफ्ट और पारंपरिक खाद्य उत्पाद उपलब्ध हैं।

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