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RANCHI NEWS : वाटर क्राइसिस से निपटने के लिए RMC ने बनाया प्लान, इतने एरिया में बने भवनों के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य

3200 स्क्वायरफीट या उससे अधिक भूमि पर बने स्ट्रक्चर के लिए कराना होगा निर्माण

by Vivek Sharma
Ranchi Municipal Corporation
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RANCHI : झारखंड की राजधानी रांची में लगातार गिरते वाटर लेवल और क्राइसिस को देखते हुए रांची नगर निगम अब किसी को राहत देने के मूड में नहीं है। नगर निगम ने घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के अभियान को तेज कर दिया है। निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन भवनों का निर्माण सात डिसमिल जमीन यानी करीब 3200 स्क्वायर फीट या उससे अधिक भूमि पर हुआ है, उनके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचना लगाना अनिवार्य है।

2.5 लाख से अधिक हाउस होल्डर रजिस्टर्ड

निगम के आंकड़ों पर नजर डाले तो रांची में कुल 2.5 लाख से अधिक हाउस होल्डर रजिस्टर्ड हैं। लेकिन इनमें से केवल 61,230 घरों में ही अब तक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है। वहीं 12,500 घरों पर नियमों का पालन नहीं करने के कारण होल्डिंग टैक्स का 50 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया गया है। मतलब कि होल्डिंग टैक्स के अलावा हाउस होल्डर से 50 परसेंट अतिरिक्त टैक्स पेनाल्टी के रूप में वसूला गया है। आगे भी लोगों से पेनाल्टी वसूल की जाएगी।

निगम ने तेज की कार्रवाई

नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि यह नियम झारखंड के शहरी भवन मानकों के तहत लागू किया गया था और 2016 के बाद इसे सख्ती से लागू किया गया। उस समय शहर में लगातार गिरते जलस्तर और अनियमित बारिश ने चिंता बढ़ा दी थी। इसके बाद से निगम ने इस दिशा में लगातार कार्रवाई तेज की है।

इतने एरिया के लिए अनिवार्य

संबंधित पदाधिकारी ने कहा कि 3200 स्क्वायर फीट या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली जमीन पर बने सभी घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यह केवल नियम पालन का मामला नहीं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है। लोगों को इसे बोझ नहीं बल्कि शहर और आने वाली पीढ़ियों के हित में जरूरी कदम के रूप में देखना चाहिए।

मेंटेनेंस भी जरूरी है सिस्टम का

एक्सपर्ट्स ने भी इस पहल का समर्थन किया है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि सिर्फ सिस्टम लगाना पर्याप्त नहीं है। इसकी नियमित देखरेख और मेंटेनेंस बेहद जरूरी है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, रांची की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कुछ इलाकों में इसका प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। ऐसे में संरचनाओं की समय-समय पर जांच और सफाई भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट को सेप्टिक टैंक और सोकपिट से कम से कम 20 फीट दूर बनाया जाना चाहिए, जिससे कि जल स्रोत दूषित न हो। इसके साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग की साल में कम से कम एक या दो बार जांच आवश्यक है।

ये है निगम की तैयारी

नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि इस मुद्दे को नीतिगत स्तर पर भी गंभीरता से लिया गया है। वार्ड पार्षदों को अपने-अपने क्षेत्रों में इस अभियान को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि दंडात्मक कार्रवाई से बेहतर है कि लोगों को जागरूक कर अधिक से अधिक घरों को इस व्यवस्था से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि निगम का उद्देश्य शहर में जल संरक्षण को बढ़ावा देना और भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।

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