
Jamshedpur News : टाटा घराना देश ही नहीं, विदेशों में भी लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। उद्योग, व्यापार और विभिन्न सेवाओं के क्षेत्र में टाटा समूह की व्यापक भूमिका है। ऐसे में इसी घराने से जुड़े कंवाई चालकों की समस्याओं और उनके अधिकारों का सवाल भी गंभीरता से उठाया जाना चाहिए।
मजदूर प्रतिनिधि ज्ञान सागर प्रसाद ने कहा कि कंवाई चालकों की संख्या भले ही सीमित हो, लेकिन वे लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चालकों ने खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक के टेंट में करीब 30 महीने से धरना जारी रखा है। उनका कहना है कि इतने लंबे समय तक आंदोलन चलने के बावजूद उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि कंवाई चालक पत्रकार नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने मुद्दों और समस्याओं को सार्वजनिक रूप से सामने रखने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। चालकों का आरोप है कि टाटा मोटर्स के नए उत्पादित चेचिस को गंतव्य तक पहुंचाने वाले चालकों को न्यूनतम मजदूरी, 24 घंटे के काम का उचित भुगतान, बैंक के माध्यम से भुगतान, बीमा, बोनस और पीएफ जैसे अधिकारों का लाभ नहीं मिल रहा है।
मजदूर प्रतिनिधि के अनुसार, चालकों को वर्तमान में भी मात्र 476 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय से उठाए जा रहे इन सवालों के बावजूद टाटा घराने, जिला प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं की गई है।
ज्ञान सागर प्रसाद ने कहा कि चालकों का लगातार जारी धरना अपने आप में व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। आखिर ऐसी क्या वजह है कि इतने लंबे आंदोलन और सार्वजनिक रूप से उठाए जा रहे मुद्दों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि कंवाई चालकों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए संबंधित पक्षों को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए, ताकि लंबे समय से चल रहे आंदोलन का अंत हो और चालकों को उनके श्रम के अनुरूप अधिकार मिल सकें।

